Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में सियासी उठापटख का दौर जारी है। शिवसेना (यूबीटी) गुट में एक बार फिर टूट की स्थिति बन चुकी है। सांसद शिवसेना यूबीटी नेता ओमप्रकाश राजे निंबालकरऔर नागेश पाटिल-आष्टीकर ने रविवार को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना जॉइन करने की पुष्टि कर दी।
इसी बीच मुंबई के भांडुप में बागी सांसद संजय दिना पाटिल के गढ़ में आयोजित रैली को शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने बागी नेताओं पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने रैली में जुटी भीड़ की ओर इशारा करते हुए कहा, 'मेरे सामने सिर्फ शिवसैनिक नहीं, बल्कि जलती हुई मशालें खड़ी हैं।'
'जहां-जहां विश्वासघात हुआ, वहां के मतदाताओं से मांगूगा माफी'
उद्धव ठाकरे ने कहा, 'मैं गद्दारों और उनके आकाओं का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने इन मशालों को फिर से जला दिया। मैंने पार्टी स्थापना दिवस पर जो वादा किया था, अब उस पर अमल शुरू कर दिया है। जहां-जहां विश्वासघात हुआ है, वहां-वहां मैं खुद जाकर मतदाताओं से माफी मांग रहा हूं।'
उन्होंने आगे कहा कि जनता ने पाला बदलने वाले सांसदों को शिवसेना और मशाल चुनाव चिह्न देखकर चुना था। उन्हें उम्मीदवार बनाना हमारी गलती थी और उसके लिए मैं आप सबसे माफी मांगता हूं. उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना को कई बार तोड़ने और कमजोर करने की कोशिश की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने हमेशा शिवसेना को खत्म करने की साजिश रची, जबकि कांग्रेस ने कभी ऐसा प्रयास नहीं किया।
बीजेपी युक्त कांग्रेस बनती जा रही: उद्धव ठाकरे
बीजेपी पर निशाना साधते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि आज लोगों को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का नाम तक याद नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “उन्होंने कांग्रेस मुक्त भारत की बात की थी, लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि यह बीजेपी युक्त कांग्रेस बनती जा रही है।” संजय राउत के बयानों को लेकर उठे विवाद पर भी उद्धव ठाकरे ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर कोई उनकी पार्टी पर आरोप लगाता है तो उसी भाषा में जवाब दिया जाना चाहिए।
इससे पहले 17 जून को दिल्ली में आयोजित शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय दल की बैठक में पार्टी के छह सांसद, संजय दिना पाटिल (मुंबई उत्तर-पूर्व), संजय देशमुख (यवतमाल), संजय जाधव (परभणी), भाऊसाहेब वाकचौरे (शिरडी), नागेश पाटिल-आष्टीकर (हिंगोली) और ओमप्रकाश राजे निंबालकर (धाराशिव) शामिल नहीं हुए। बैठक से उनकी गैरमौजूदगी के बाद महाराष्ट्र की राजनीतिक हलचल तेज हो गई और उनके संभावित दल बदलने को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया।
