Om Birla: अपने खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के संबंध में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आज सदन में अपने विचार रखे। उन्होंने सदन की कार्यवाही में निष्पक्षता, अनुशासन का हवाला दिया। ओर बिरला ने कहा, लोकसभा में मुझे हटाने के प्रस्ताव पर 12 घंटे तक चर्चा हुई, जिसमें विपक्ष ने निष्पक्षता पर चिंता जताई। मैंने हमेशा यह प्रयास किया है कि लोकसभा में प्रत्येक सदस्य नियमों के अनुसार अपने विचार रखें, इसके लिए सभी को समय देने का प्रयास किया है। मैंने हमेशा यह प्रयास किया कि सदन की कार्यवाही निष्पक्षता, अनुशासन, संतुलन और नियमों के साथ संचालित हो।
स्पीकर ने कहा, मैंने अपने नैतिक कर्तव्य का पालन करते हुए अपने खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिए जाने के साथ ही लोकसभा की कार्यवाही के संचालन से खुद को अलग कर लिया। सदन द्वारा मुझ पर व्यक्त किए गए विश्वास के लिए सभी का आभार व्यक्त करता हूं, इस विश्वास को अपनी जिम्मेदारी मानते हुए पूरी निष्ठा, निष्पक्षता और संवैधानिक मर्यादा के साथ निभाऊंगा।
मैं पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ अपना कर्तव्य निभाता रहूंगा
उन्होंने सत्ता पक्ष के सदस्यों द्वारा मेजें थपथपाने के बीच कहा, सदन नियमों और विनियमों का पालन करते हुए चल रहा है और भविष्य में भी इसी तरह चलता रहेगा, चाहे किसी सदस्य को यह स्वीकार्य हो या न हो। मैं पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ अपना कर्तव्य निभाता रहूंगा।
13 फरवरी को समाप्त हुए बजट सत्र के पहले भाग के दौरान अविश्वास प्रस्ताव दिए जाने के बाद गुरुवार को बिरला पहली बार सदन की कार्यवाही का संचालन करने आए थे। सत्र का दूसरा भाग 9 मार्च को शुरू हुआ। स्पीकर ने कहा कि पिछले दो दिनों की बहस के दौरान कुछ सदस्यों ने कहा कि विपक्ष के नेता को बोलने के पर्याप्त अवसर नहीं दिए जाते हैं और उन्हें जब चाहे और किसी भी विषय पर बोलने की अनुमति दी जानी चाहिए।
प्रधानमंत्री भी अध्यक्ष की अनुमति के बिना नहीं बोल सकते
सदन में सभी को बोलने का अधिकार है, लेकिन नियमों और विनियमों का पालन करते हुए। कोई भी सदस्य, यहां तक कि प्रधानमंत्री या कोई मंत्री भी, अध्यक्ष की अनुमति के बिना नहीं बोल सकता। सदन के किसी भी सदस्य को किसी भी समय और किसी भी विषय पर बोलने का विशेषाधिकार नहीं है। वह तभी बोल सकता है जब अध्यक्ष अनुमति दें। बिरला ने कहा कि सांसदों को सदन में बोलने की स्वतंत्रता है, लेकिन उन्हें नियमों और विनियमों का पालन करना होगा।
उन्होंने उन आरोपों का भी जवाब दिया कि कुछ सदस्यों के बोलने के दौरान उनके माइक्रोफोन बंद कर दिए जाते हैं। मेरे पास माइक्रोफोन चालू या बंद करने का कोई स्विच नहीं है। माइक्रोफोन तभी चालू किया जाता है जब अध्यक्ष किसी सदस्य को बोलने की अनुमति देते हैं। अपने भाषण के तुरंत बाद बिरला ने सदन को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव खारिज
बता दें कि बुधवार 11 मार्च को लोकसभा ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को नारेबाजी के बीच ध्वनि मत से खारिज कर दिया। कार्यवाही के दौरान सदन की अध्यक्षता कर रहे बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने घोषणा की कि स्पीकर के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव बहुमत के अभाव में गिर गया है। उन्होंने विपक्षी सांसदों से बार-बार अपनी सीटों पर लौटने और मतदान प्रक्रिया में शामिल होने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहने पर उन्होंने सदन की राय ली और प्रस्ताव को वॉइस वोट से खारिज घोषित कर दिया। इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।
अमित शाह का विपक्ष पर तीखा हमला
इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में विपक्ष पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर विपक्ष ने भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि संविधान ने स्पीकर को सदन में मध्यस्थ (मीडिएटर) की भूमिका दी है और उस पर संदेह करना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है। अमित शाह ने कहा कि संविधान ने स्पीकर को मध्यस्थ की भूमिका दी है और आपने उसी मध्यस्थ पर संदेह जताया है। 75 वर्षों में संसद के दोनों सदनों ने हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव को ‘पाताल’ से भी गहरा किया है, लेकिन विपक्ष ने उसी नींव की प्रतिष्ठा पर सवाल उठाया है।
