'ऑपरेशन सिंदूर' में भारी नुकसान झेलने के बाद आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) ने अपनी रणनीति बदलते हुए अपनी 'महिला टेरर विंग' को दुनिया के सामने पेश कर दिया है। रविवार को पाकिस्तान के फैसलाबाद में आयोजित एक रैली के दौरान लश्कर की इस महिला स्क्वॉड को न केवल सार्वजनिक रूप से देखा गया, बल्कि ये आतंकी आकाओं की सुरक्षा में भी तैनात नजर आईं।
हाफिज सईद के बेटे की सुरक्षा में तैनात महिला विंग
सूत्रों के मुताबिक, फैसलाबाद में हुई इस रैली को आतंकियों ने ‘सच की लड़ाई’ का नाम दिया था। मंच पर लश्कर के सरगना हाफिज सईद का बेटा तल्हा सईद और अन्य टॉप कमांडर मौजूद थे।
चौंकाने वाली बात यह रही कि मंच की सुरक्षा की कमान लश्कर की इस नई 'महिला टेरर स्क्वॉड' के हाथों में थी, जो लड़ाकू पोशाक (Combat Gears) में नजर आईं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि लश्कर अब महिलाओं का इस्तेमाल सुरक्षा घेरों में सेंध लगाने और सुसाइड बॉम्बर के तौर पर करने की फिराक में है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदली रणनीति
खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, 'ऑपरेशन सिंदूर' में आतंकियों को मिली करारी शिकस्त के बाद लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) ने अपनी महिला विंग को सक्रिय करने का फैसला किया है। जैश-ए-मोहम्मद ने अपनी महिला यूनिट को 'जमात-उल-मुमिनात' का नाम दिया है।
लश्कर ने 'मुस्लिम मरकजी महिला लीग' की आड़ में 'तैय्यबत' नाम से अपनी महिला विंग खड़ी की है। लश्कर यह दावा कर रहा है कि वह महिलाओं को 'शिक्षित' कर रहा है, लेकिन हकीकत में यह रेडिकलाइजेशन का नया केंद्र बन चुका है।
पढ़ी-लिखी और पेशेवर महिलाओं को निशाना बना रहे आतंकी
सुरक्षा एजेंसियों की जांच में एक बेहद डरावना सच सामने आया है। दिल्ली के लाल किले पर हुए हमले में डॉ. शाहीन सईद की भूमिका ने साबित कर दिया है कि आतंकी संगठन अब पढ़ी-लिखी और पेशेवर महिलाओं को अपना निशाना बना रहे हैं।
अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े डॉ. सईद पर सुसाइड बॉम्बर डॉ. उमर उन नबी जैसे आतंकियों को लॉजिस्टिक और वित्तीय सहायता पहुंचाने का आरोप है। यह पैटर्न बताता है कि लश्कर अब सीधे तौर पर 'ब्रेनवॉश' की तकनीक का इस्तेमाल कर महिलाओं को आत्मघाती हमलों के लिए तैयार कर रहा है।
लड़ाकू वर्दी में सार्वजनिक रैलियों में शामिल होने वाली लश्कर की यह महिला स्क्वॉड अब ग्लोबल सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं की भर्ती के पीछे लश्कर का मुख्य उद्देश्य जांच एजेंसियों को चकमा देना और ऐसे स्थानों पर हमले करना है जहां महिला होने के नाते सुरक्षा जांच में थोड़ी ढील मिल सकती है। सुरक्षा एजेंसियां अब इन महिला आतंकी विंग्स के नेटवर्क को खंगालने में जुट गई हैं।
