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'सपा बहादुर मौन तोड़ देते तो अच्छा रहता...', अखिलेश ने की कर्नाटक में कांग्रेस की तारीफ, केशव मौर्य ने ले ली चुटकी

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 13, 2023, 02:08 PM IST

UP Nagar Nikay Chunav Result 2023: अखिलेश यादव ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन की तारीफ की, जिसके बाद केशव प्रसाद मौर्या ने यूपी नगर निकाय चुनाव परिणामों को लेकर उन पर तंज कसा।

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अखिलेश यादव - केशव मौर्या

Photo : BCCL

UP Nagar Nikay Chunav Result 2023: कर्नाटक में हुए विधानसभा चुनाव और यूपी नगर निकाय चुनाव की तस्वीर धीरे-धीरे साफ होने लगी है। कर्नाटक में जहां कांग्रेस सत्ता में वापसी करती दिख रही है तो उत्तर प्रदेश में सीएम योगी का जलवा बरकरार है। यहां 17 नगर निगमों में से 16 पर भाजपा स्पष्ट रूप से जीतते हुए दिख रही है। सपा का यहां सूपड़ा साफ हो गया है और वह हर सीट पर हार रही है।

हालांकि, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव निकाय चुनाव में सपा की दुर्गति पर चिंता जताने की बजाय कर्नाटक में कांग्रेस के प्रदर्शन पर खुश हैं। इसको लेकर शनिवार को उन्होंने ट्वीट भी किया और भाजपा की जमकर आलोचना की, जिसके बाद यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने उनकी चुटकी ले ली है।

अखिलेश ने भाजपा पर साधा था निशाना

अखिलेश यादव ने अपने ट्वीट में कहा, कर्नाटक का संदेश ये है कि भाजपा की नकारात्मक, सांप्रदायिक, भ्रष्टाचारी, अमीरोन्मुखी, महिला-युवा विरोधी, सामाजिक-बँटवारे, झूठे प्रचारवाली, व्यक्तिवादी राजनीति का अंतकाल शुरू हो गया है। ये नये सकारात्मक भारत का महंगाई, बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार व वैमनस्य के ख़िलाफ़ सख़्त जनादेश है।

केशव मौर्या ने ली चुटकी

इस ट्वीट के बाद उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने उनकी चुटकी ले ली। उन्होंने कहा, सपा बहादुर अखिलेश यादव जी दक्षिण भारत कर्नाटक के दौरे से वापस आ गए हैं, अब उत्तर प्रदेश के नगर निकाय चुनाव के लिए भी मौन तोड़ देते तो अच्छा रहेगा। उन्होंने कहा, ट्रिपल इंजन सरकार बन रही है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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