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मोदी कैबिनेट छोड़ना चाहता है BJP का ये खास सांसद, कल ही हुई थी शपथ

BJP MP Suresh Gopi: लोकसभा चुनाव में पहली बार भारतीय जनता पार्टी को केरल जैसे दक्षिण राज्य में सफलता मिली है। बीजेपी नेता सुरेश गोपी यहां की त्रिशूर लोकसभा सीट से सांसद निर्वाचित हुए। वह केरल में भाजपा के पहले और इकलौते सांसद हैं। रविवार को उन्होंने केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली थी।

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केरल से भाजपा सांसद सुरेश गोपी

BJP MP Suresh Gopi: नरेंद्र मोदी सरकार 3.0 के शपथ ग्रहण समारोह के अगले ही दिन एक सांसद ने मंत्री पद छोड़ने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा है कि वह सांसद के रूप में काम जारी रखना चाहते हैं और केंद्रीय जिम्मेदारियों से मुक्त होना चाहते हैं। ये मंत्री कोई और नहीं केरल से बीजपी के इकलौते सांसद सुरेश गोपी हैं, जिन्होंने रविवार को केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली थी, अब उन्होंने मंत्री पद को छोड़ने की इच्छा जताई है। आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक सुरेश गोपी ने मंत्री पद छोड़ने की इच्छा शपथ ग्रहण समारोह के बाद एक क्षेत्रीय चैनल से बातचीत के दौरान जताई।

सुरेश गोपी ने मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के जानेमाने एक्टर भी हैं। उन्होंने कहा कि मैंने कई फिल्में साइन की हैं और उन्हें पूरा करना है। ऐसे में वह केरल के त्रिशूर के सांसद के रूप में काम जारी रखना चाहते हैं और केंद्र की जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहते हैं। सुरेश गोपी ने कहा कि उन्होंने मंत्री पद नहीं मांगा है और उम्मीद है कि उन्हें जल्द ही पद से मुक्त कर दिया जाएगा।

केरल में भाजपा के इकलौते सांसद

इस लोकसभा चुनाव में पहली बार भारतीय जनता पार्टी को केरल जैसे दक्षिण राज्य में सफलता मिली है। बीजेपी नेता सुरेश गोपी यहां की त्रिशूर लोकसभा सीट से सांसद निर्वाचित हुए। वह केरल में भाजपा के पहले और इकलौते सांसद हैं। आम चुनाव में सुरेश गोपी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी एवं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के वी एस सुनील कुमार को रोमांचक मुकाबले में हराया था। निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, गोपी को 4,12,338 वोट मिले, जबकि कुमार को 3,37,652 मत मिले थे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के. मुरलीधरन 3,28,124 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे थे।

सांसद बनने से पहले दो बार हारे चुनाव

सुरेश गोपी 2024 के चुनाव में जीत से पहले दो बार चुनाव हार भी चुके हैं। इससे पहले सुरेश गोपी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में त्रिशूर से चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। दो साल बाद 2021 के विधानसभा चुनाव में भी उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। लोकसभा के लिए चुने जाने से पहले, गोपी को 2016 में राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया था। उच्च सदन में उनका कार्यकाल 2022 तक रहा।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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