Monsoon 2026: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने रविवार को कहा कि राज्य बारिश की भारी कमी का सामना कर रहा है और जलाशयों का जलस्तर तेजी से घट रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि केंद्र सरकार से सहायता की मांग करते समय पेयजल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
मंत्रिमंडल की विशेष बैठक की अध्यक्षता करने और उपायुक्तों, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लगभग चार घंटे तक समीक्षा बैठक करने के बाद शिवकुमार ने कहा कि राज्य के बड़े हिस्सों में सामान्य से लगभग 60 प्रतिशत कम बारिश हुई है। उन्होंने प्रशासन को जमीनी स्तर पर सूखा प्रबंधन के उपाय तेज करने के निर्देश दिए।
CM ने मंत्रिमंडल की विशेष बैठक बुलाई
मुख्यमंत्री ने कहा, ''सूखे की स्थिति पर चर्चा के लिए हमने मंत्रिमंडल की विशेष बैठक बुलाई। आज रविवार होने के बावजूद हमने सभी अधिकारियों के साथ चार घंटे तक बैठक कर हालात की समीक्षा की। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि काम की तलाश में किसी को भी गांव छोड़कर न जाना पड़े।''
समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक, शिवकुमार ने कहा कि राज्य के 178 तालुकों में बारिश की कमी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि इनमें से 158 तालुकों में सामान्य से काफी कम बारिश हुई है, जबकि विजयनगर जिले की स्थिति विशेष रूप से गंभीर है। उन्होंने कहा कि राज्य के जलाशयों की स्थिति चिंताजनक है और इनमें कुल जल भंडारण पिछले वर्ष इसी अवधि में दर्ज स्तर का केवल लगभग 40 प्रतिशत रह गया है।
'पेयजल को लेकर तत्काल कोई समस्या नहीं'
उन्होंने कहा, ''फिलहाल उपलब्ध पानी केवल पेयजल की जरूरतें पूरी करने के लिए ही पर्याप्त प्रतीत होता है। हालांकि, अभी पेयजल को लेकर तत्काल कोई समस्या नहीं है।'' मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने अधिकारियों को पानी के उपयोग का सावधानीपूर्वक नियमन करने और वास्तविक जल उपलब्धता के आधार पर बुवाई संबंधी निर्णयों के बारे में किसानों को लगातार मार्गदर्शन देने के निर्देश दिए हैं।
मांड्या जिले का उल्लेख करते हुए शिवकुमार ने कहा कि कावेरी नदी का केवल सीमित मात्रा में पानी छोड़ा गया है और वह भी सिर्फ पेयजल की जरूरतों को पूरा करने के लिए। उन्होंने कहा, ''मैं वहां के किसानों से अपील करता हूं कि वे सिंचाई के लिए पानी मिलने की उम्मीद में खेती शुरू न करें।'' मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे राज्य में भूजल स्तर में जबरदस्त गिरावट आई है और तालाबों में पानी का स्तर भी काफी कम हो गया है।
'पेयजल व्यवस्था के लिए धन की कोई कमी नहीं'
पेयजल की जरूरतों को पूरा करने के लिए शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने पहले ही प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में केवल पेयजल संबंधी कार्यों के लिए एक-एक करोड़ रुपये आवंटित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों के खातों में पहले से ही लगभग 329 करोड़ रुपये उपलब्ध हैं और आपातकालीन पेयजल व्यवस्था के लिए धन की कोई कमी नहीं है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारियों को सूखे की स्थिति को लेकर अगले 15 दिनों के भीतर केंद्र सरकार को भेजे जाने वाले ज्ञापन को तैयार करने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि उसमें किए गए प्रत्येक दावे के समर्थन में उचित दस्तावेज हों। उन्होंने कहा, ''मैं पहले ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से केंद्र सरकार की एक टीम भेजने का अनुरोध कर चुका हूं।''
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को संसद में उठाए जाने से पहले कर्नाटक के सांसदों को इसकी जानकारी दी जाएगी। शिवकुमार ने अधिकारियों को पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने और उनके लिए आपात कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कलबुर्गी और बेलगावी संभागों के लिए क्षेत्रीय स्तर की सूखा समीक्षा बैठकें पहले ही आयोजित की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि इसी तरह की बैठक 25 जुलाई को चित्रदुर्ग में और उसके बाद मैसूरु में आयोजित की जाएगी।
