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PM Modi के कड़े रुख के बाद नरम पड़े ट्रूडो के तेवर, बोले- हम भारत को उकसाना नहीं चाहते'

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 19, 2023, 09:26 PM IST

Justin Trudeau: मोदी सरकार के एक्शन में आने के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा है कि भारत सरकार को इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लेने की जरूरत है। हम ऐसा कह रहे हैं। हमारी ओर से उकसाने या इसे आगे बढ़ाने की कोशिश नहीं की जा रही है।

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जस्टिन ट्रूडो- पीएम मोदी

Photo : BCCL

Justin Trudeau: जस्टिन ट्रूडो के आरोपों के बाद एक्शन में आई मोदी सरकार के कड़े रुख को देखते हुए कनाडा बैकफुट पर आ गया है। अब कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सफाई दी है। उन्होंने कहा है कि वह भारत को उकसाना नहीं चाहते हैं। वह बस इतना चाहते हैं कि भारत सरकार इस मसले को गंभीरता से ले। ट्रूडो का यह बयान तब आया है, जब आज भारत सरकार ने वरिष्ठ कनाडाई राजनिकय को निष्कासित कर दिया है।

ट्रूडो ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि भारत सरकार को इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लेने की जरूरत है। हम ऐसा कह रहे हैं। हमारी ओर से उकसाने या इसे आगे बढ़ाने की कोशिश नहीं की जा रही है। बता दें, ट्रूडो ने सोमवार को संसद में कहा था कि अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या और भारत सरकार के एजेंट के बीच संभावित संबंध के पुख्ता आरोप हैं। इसे लेकर कनाडा की सुरक्षा एजेंसियां पूरी सक्रियता से जांच कर रही हैं।

भारत ने दिया जैसे को तैसा जवाब

कनाडा ने भारत सरकार पर आरोप लगाते हुए एक भारतीय अधिकारी को कनाडा की ओर से निष्कासित कर दिया था। इसके कुछ घंटे बाद भारत सरकार भी एक्शन में आई और ट्रूडो के आरोपों को आधारहीन और बेतुका बताया। इसके साथ ही मंगलवार को विदेश मंत्रालय ने भारत में कनाडा के उच्चायुक्त कैमरून मैके को तलब किया और सीनियर कनाडाई राजनयिक को निष्कासित करने के फैसले के बारे में सूचित किया। भारत ने कनाडाई अधिकारी को पांच दिन में भारत छोड़ने का आदेश दिया है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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