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JNU में दिखा पश्चिम एशिया में तनाव का असर, लेबनान-फिलिस्तीन और ईरानी राजदूत के कार्यक्रम रद्द

Jawaharlal Nehru University: भारत में ईरानी राजूदत डॉ. इराज इलाही का व्याख्यान होना था। उन्हें "पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों को ईरान कैसे देखता है" विषय पर बोलना था। हालांकि, सेमिनार से कुछ घंटे पहले उनके कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया।

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जेएनयू ने ईरान, फिलिस्तीन और लेबनान के राजदूतों के सेमिनार किए कैंसल।

Photo : iStock

Jawaharlal Nehru University: पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का असर भारत में भी दिख रहा है। खबर है कि शुक्रवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यायल (JNU) ने भारत में ईरानी, फिलिस्तीनी और लेबनानी राजदूतों के सेमिनार रद्द कर दिए गए हैं। ये सेमिनार जेएनयू के पश्चिम एशियाई अध्ययन केंद्र में आयोजित होने थे। सेमिनार रद्द किए जाने के पीछे अपरिहार्य कारणों का हवाला दिया गया है।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, शुक्रवार को भारत में ईरानी राजूदत डॉ. इराज इलाही का व्याख्यान होना था। उन्हें "पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों को ईरान कैसे देखता है" विषय पर बोलना था। हालांकि, इस सेमिनार से कुछ घंटे पहले, छात्रों को सुबह 8.09 बजे सेमिनार रद्द होने का ईमेल मिला। ईमेल में अपरिहार्य कारणों का हवाला दिया गया।

लेबनानी और फिलिस्तीनी राजदूत के सेमिनार भी कैंसल

सिर्फ ईरान ही नहीं लेबनान और फिलिस्तीन के राजदूत के भी सेमिनार भी कैंसल किए गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 7 नवंबर को फिलिस्तीनी राजदूत अदनान अबू अल-हैजा का सेमिनार होना था। उसे रद्द कर दिया गया है। साथ ही 14 नवंबर को लेबनानी राजदूत डॉ. रबी नरश के साथ लेबनान पर केंद्रित एक सत्र को भी रद्द करने की घोषणा की गई है।

विरोध प्रदर्शन का था डर

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बिना कोई स्पष्टीकरण दिए कार्यक्रमों को रद्द कर दिया गया है। दरअसल, सूत्रों का कहना है कि संभावित विरोध प्रदर्शनों की चिंताओं के कारण कार्यक्रम रद्द किए गए। डर था कि ईरान, फिलिस्तीन और लेबनान के राजदूत के कार्यक्रम के समय कैंपस में बड़ा विरोध प्रदर्शन हो सकता था।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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