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Jhansi: मालगाड़ी में मिला संदिग्ध इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, मौके पर पहुंचा बम निरोधक दस्ता

Breaking News : छत्तीसगढ़ से कोयला लेकर राजस्थान के सूरजगढ़ जा रही एक मालगाड़ी में संदिग्ध इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस मिलने से हड़कंप मच गया। झांसी के पास मालगाड़ी की बोगी में मिले इस डिवाइस की जांच करने बम निरोधक दस्ता पहुंचा, आपको इस रिपोर्ट में बताते हैं कि फिर क्या हुआ।

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मालगाड़ी में मिला संदिग्ध डिवाइस। (सांकेतिक फोटो)

Bhopal: दिल्ली रेल लाइन पर झांसी के पास मालगाड़ी की बोगी में संदिग्ध इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस रखे होने की खबर से रेल प्रशासन व पुलिस में हड़कंप मच गया। आनन फानन में आरपीएफ व जीआरपी के साथ ही एसएसपी झांसी सुधा सिंह सहित तमाम अधिकारी मौके पर पहुंच गये।

मालगाड़ी में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस मिलने से हड़कंप

बम निरोधक दस्ता ने रखी हुई इस इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जांच की, तो वह जीपीएस ट्रैकर निकला। इसके बाद सभी ने राहत की सांस ली। जीपीएस ट्रेकर को कब्जे में लेकर जीआरपी ने जांच शुरू कर दी है। इस घटना से कुछ यात्री गाड़ियों का संचालन भी प्रभावित हुआ। रेलवे ट्रैक पर सतर्कता के दावों के बीच इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के साथ ट्रेन की बोगी के लगभग एक हजार किलोमीटर का सफर करने से रेलवे की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

राजस्थान के सूरजगढ़ जा रही थी मालगाड़ी

बताया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ से कोयला लेकर एक मालगाड़ी राजस्थान के सूरजगढ़ जा रही थी। आज सुबह लगभग साढ़े नौ बजे जब झांसी के बिजौली स्टेशन पर खड़ी थी, तभी ट्रेन के गार्ड सी.एल. मीणा नीचे उतरे तो उनकी नजर गार्ड बोगी के पास लगी बोगी में रखी एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर पड़ी, जिसमें लाइट टिमटिमा रही थी। इसे देख वह डर गये और तुरंत इसकी सूचना रेलवे कंट्रोल को दी।

ट्रेन में संदिग्ध डिवाइस कि खबर मिलते ही रेल प्रशासन हरकत में आ गया और सिविल पुलिस को भी सूचित कर दिया। मामले को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी सुधा सिंह भी बम दस्ते के साथ पहुंच गई। जांच में डिवाइस को जीपीएस ट्रैकर बताए जाने पर सभी ने राहत की सांस ली। रेलवे फोर्स अब पूरे मामले की जांच में जुट गये हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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