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जयंत चौधरी के साथ NDA की बैठक में ऐसा क्या हुआ, जिसे सपा ने बताया चौधरी चरण सिंह का अपमान

UP Politics: समाजवादी पार्टी ने एलजेपी प्रमुख जयंत चौधरी पर इशारों-इशारों में तंज कसा है। सपा का कहना है कि राजग की बैठक में जयंत को मंच पर स्थान नहीं मिलना चौधरी चरण सिंह का अपमान है। सपा ने कहा कि भाजपा की जाट समाज से नफरत का भंडाफोड़ हो गया है।

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जयंत चौधरी को मंच पर नहीं मिली जगह।

Photo : Times Now Digital

Samajwadi Party Slams BJP: विपक्षी दलों के गठबंधन 'इंडिया’ के घटक दल समाजवादी पार्टी (सपा) ने शुक्रवार को राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की बैठक में राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के प्रमुख जयंत चौधरी को मंच पर स्थान न मिलने का दावा करते हुए कहा कि भाजपा की जाट समाज से नफरत और चौधरी चरण सिंह के प्रति झूठे सम्मान का भंडाफोड़ हो गया है।

जयंत चौधरी पर सपा ने कसा तीखा तंज

समाजवादी पार्टी के आधिकारिक 'एक्‍स' हैंडल से किये गये एक पोस्ट में राजग की बैठक की तस्वीरें साझा करते हुए कहा गया कि 'रालोद पार्टी के मुखिया जयंत चौधरी को मंच पर स्थान तक नहीं दिया गया जबकि उनकी दो (लोकसभा) सीटें हैं, वहीं एक-एक सीट वाले दलों के नेताओं को मंच पर साथ में बिठाया गया।'

चौधरी चरण सिंह के अपमान का किया दावा

पोस्ट में कहा गया है, 'भाजपा की जाट समाज से नफरत और स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह जी व चौधरी अजित सिंह जी के प्रति झूठे सम्मान का भंडाफोड़ हो गया है।' सपा के मीडिया प्रकोष्ठ ने यह भी कहा 'जयंत चौधरी जी अगर सच में किसान हितैषी हैं तो उन्हें राजग से दूरी बनानी चाहिए और किसान हितों को लेकर भाजपा के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। छोटे लालच के चक्कर में अपने स्वाभिमान और किसान हितों का सौदा भाजपा से नहीं करना चाहिए।'

जानिए क्यों सपा ने जयंत चौधरी को घेरा

सपा के मीडिया प्रकोष्ठ द्वारा साझा की गईं तस्‍वीरों में मंच पर अपना दल (एस) की प्रमुख अनुप्रिया पटेल और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रमुख जीतन राम मांझी नजर आ रहे हैं, जो क्रमश: उत्तर प्रदेश की मिर्जापुर और बिहार की गया लोकसभा सीट से चुनाव जीते हैं और अपने-अपने दलों के अकेले विजेता हैं।

वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री चरण सिंह के पौत्र व अजित सिंह के पुत्र जयंत चौधरी की अगुवाई वाले रालोद को बिजनौर और बागपत से लोकसभा चुनाव में जीत मिली है। जयंत चौधरी खुद भी राज्यसभा के सदस्य हैं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने भी इस ओर इशारा करते हुए कहा, "भाजपा को ऐसे काम करने की आदत है।" अजय राय ने कहा, "भाजपा को अपने छोटे सहयोगियों का अपमान करने की आदत है।"

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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