आज लोकसभा में वंदे मातरम् पर चर्चा के दौरान पीएम मोदी ने कांग्रेस को निशाने पर लिया। साथ ही उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू का किस्सा भी बयां किया जिसमें उन्होंने वंदे मातरम् पर को लेकर सवाल उठाए थे। पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने वंदे मातरम् पर समझौता किया जो देश के लिए दुर्भाग्य है। कांग्रेस ने वंदे मातरम् के टुकड़े किए। कांग्रेस ने जिन्ना से समझौता कर लिया था।
मुस्लिम लीग ने वंदे मातरम् का कड़ा विरोध किया
नेहरू से जुड़ी बात का जिक्र कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लिखा था कि 'आनंद मठ में वंदे मातरम् की पृष्ठभूमि मुसलमानों को नाराज कर सकती है'। उन्होंने यह भी कहा, मुस्लिम लीग ने वंदे मातरम् का कड़ा विरोध करना शुरू कर दिया था। मुहम्मद अली जिन्ना ने 15 अक्टूबर 1937 को लखनऊ से वंदे मातरम् के खिलाफ नारा लगाया था... मुस्लिम लीग के निराधार बयानों का कड़ा और करारा जवाब देने के बावजूद नेहरू ने वंदे मातरम् की जांच शुरू कर दी।
नेहरू ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को एक पत्र लिखा
पीएम मोदी ने कहा, इसके पांच दिन बाद, नेहरू ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को एक पत्र लिखा जिसमें उन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना की भावना से सहमति जताते हुए लिखा, 'आनंद मठ में वंदे मातरम की पृष्ठभूमि मुसलमानों को नाराज कर सकती है'... इसके बाद कांग्रेस ने कहा कि 26 अक्टूबर से बंगाल में वंदे मातरम् के प्रयोग की जांच की जाएगी... दुर्भाग्य से, 26 अक्टूबर को कांग्रेस ने वंदे मातरम पर समझौता कर लिया। उन्होंने वंदे मातरम गीत को दो भागों में बांट दिया। इस फैसले के पीछे सामाजिक समरसता का मुद्दा था, लेकिन इतिहास गवाह है कि कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के आगे घुटने टेक दिए थे।
अल्पसंख्यकों को खुश करने का तरीका
अल्पसंख्यकों को खुश करने का यही उनका तरीका था... बाद में कांग्रेस को घुटने टेककर भारत के विभाजन के लिए सहमत होना पड़ा... कांग्रेस की नीतियां आज भी वही हैं, और इसी के साथ, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस मुस्लिम लीग कांग्रेस (एमएलसी) बन गई है। आज भी कांग्रेस और उसके सहयोगी दल वंदे मातरम का विरोध करते हैं और इसे लेकर विवाद पैदा करने की कोशिश करते हैं।
