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शहीद दिवस: श्रीनगर की ओर जाने वाले सभी रास्तों पर पुलिस और सुरक्षाबलों की भारी तैनाती, NC का दावा- हमारे नेता नजरबंद

अगस्त 2019 में तत्कालीन राज्य के दो केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठन से पहले 13 जुलाई जम्मू और कश्मीर में सार्वजनिक अवकाश हुआ करता था। हालांकि, प्रशासन ने 2020 में इस दिन को राजपत्रित छुट्टियों की सूची से हटा दिया।

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जम्मू-कश्मीर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था (फाइल फोटो- PTI)

Jammu Kashmir: शहीद दिवस के अवसर पर कानून-व्यवस्था की समस्या की आशंका के चलते श्रीनगर शहर की ओर जाने वाले सभी प्रवेश मार्गों पर पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की गई है। अधिकारियों ने बताया कि केवल अधिकारियों और सुरक्षा बलों के वाहनों को ही प्रवेश मार्गों पर लगाए गए बैरिकेड्स को पार करने की अनुमति दी गई। अधिकारियों ने रविवार को पुराने शहर के नौहट्टा इलाके में शहीदों के कब्रिस्तान की ओर जाने वाली सभी सड़कों को सील कर दिया, वहीं सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस ने दावा किया है कि उसके कई नेताओं को नजरबंद कर दिया गया है।

13 जुलाई, 1931 के शहीदों को श्रद्धांजलि देने का मामला

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 13 जुलाई, 1931 के शहीदों को श्रद्धांजलि देने की अनुमति के लिए श्रीनगर के जिला मजिस्ट्रेट को आवेदन दिया था। हालांकि, जिला प्रशासन ने अनुमति देने से इनकार कर दिया। श्रीनगर पुलिस ने X पर जारी एक सार्वजनिक परामर्श में कहा, श्रीनगर जिला प्रशासन ने 13 जुलाई, 2025 (रविवार) को ख्वाजा बाजार, नौहट्टा की ओर जाने वाले सभी आवेदकों को अनुमति देने से इनकार कर दिया है।

पुलिस ने कहा कि जनता को इन निर्देशों का पालन करने और ज़िला प्रशासन द्वारा जारी आदेशों का उल्लंघन न करने की सलाह दी जाती है। पुलिस ने चेतावनी दी कि इन आदेशों का उल्लंघन करने पर संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अनुमति न दिए जाने को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुख्य प्रवक्ता तनवीर सादिक ने कहा कि 13 जुलाई कोई सामान्य तारीख नहीं है। सादिक ने एक्स पर कहा, यह सम्मान, न्याय और अधिकारों की रक्षा में दिए गए बलिदानों की एक गंभीर याद दिलाता है। सादिक ने आगे कहा कि कश्मीर के लोग शांतिपूर्वक, गरिमापूर्ण और अटूट संकल्प के साथ अपने शहीदों का सम्मान करते रहेंगे।

केंद्र सरकार ने सार्वजनिक अवकाश किया रद्द

अगस्त 2019 में तत्कालीन राज्य के दो केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठन से पहले 13 जुलाई जम्मू और कश्मीर में सार्वजनिक अवकाश हुआ करता था। हालांकि, प्रशासन ने 2020 में इस दिन को राजपत्रित छुट्टियों की सूची से हटा दिया। इस दिन, मुख्यधारा के राजनीतिक नेता महाराजा के शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए डोगरा सेना की गोलियों का शिकार हुए कश्मीरियों को श्रद्धांजलि देने के लिए शहीदों की कब्रगाह पर जाते थे।

इस बीच, सादिक ने एक्स पर एक नए पोस्ट में दावा किया कि पार्टी के कई नेताओं को नज़रबंद कर दिया गया है। उन्होंने कहा, कल रात से, मैं और मेरे कई साथी, जिनमें गुपकार पार्टी नेतृत्व, मुख्यमंत्री के सलाहकार और अधिकांश मौजूदा विधायक शामिल हैं, मेरे घर में बंद हैं। उन्होंने कहा कि यह न सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि 13 जुलाई के शहीदों की स्मृति को दबाने और उन्हें सम्मान देने के अधिकार को नकारने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास है। ऐसी कार्रवाई न सिर्फ अनावश्यक है, बल्कि अनुचित, बेहद असंवेदनशील और इतिहास के प्रति चिंताजनक उपेक्षा को दर्शाती है।

Amit Mandal
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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