चीन (China) के साथ लद्दाख (Ladakh) समेत कई सीमाओं पर तनातनी की स्थिति बनी हुई है। गलवाट घाटी (Galwan Valley) संघर्ष के बाद से यह तनातनी और बढ़ गई है। इसी को ध्यान में रखने हुए एक तरफ सरकार सीमा के नजदीक सड़कों का निर्माण करवा रही है, हथियारों की तैनाती हो रही है, हवाई पट्टी बनाई जा रही है तो दूसरी ओर जवानों को एक खास तरह की ट्रेनिंग दी जा रही है, ताकि वो बिना हथियारों वाली इस लड़ाई को आसानी से जीत सकें।
दरअसल जब चीनी सैनिकों ने गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों पर हमला बोला था, तब उन्होंने गोली नहीं चलाई थी, आधुनिक हथियारों की जगह पारंपरिक हथियारों का प्रयोग किया था। तब भारत के जवानों ने भी मुंहतोड़ जवाब दिया था, लेकिन अब इसके लिए आईटीबीपी और जबरदस्त तैयारी कर रही है। चीन से लगती हुई इन सीमाओं की कमान आईटीबीपी के पास ही है। इसलिए आईटीबीपी अब अपने जवानों को बिना हथियारों के लड़ाई लड़ने की ट्रेनिंग दे रही है।
इस ट्रेनिंग में आईटीबीपी 20 से ज्यादा प्रकार के युद्धाभ्यास जवानों को करा रही है। जिसमें जूडो, कराटे से लेकर अन्य कई तरह के मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दी जा रही है। ट्रेनिंग में यह भी सिखाया जा रहा है कि बिना हथियारों के दुश्मन पर कैसे विजय पाई जा सकती है। मतलब अगर कभी चीन ने दूसरे गलवान को अंजाम देने की कोशिश की तो उसकी हालत और बुरी हो सकती है।
गलवान घाटी में तब भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए थे, वहीं चीन ने काफी विवादों के बाद चार सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि की थी, हालांकि ये संख्या काफी ज्यादा है। इस संघर्ष के बाद से चीन से लगती भारत की सीमा पर दोनों ओर से कई महीनों से हलचल बढ़ी हुई है। जिसके बाद से आईटीबीपी भविष्य के जंग के लिए अपने जवानों को तैयार करने में जुटी है।
