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महिलाओं को अंतरिक्ष में भेजेगा इसरो, सोमनाथ ने बताया 'गगनयान मिशन' का सॉलिड प्लान

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Oct 23, 2023, 07:19 AM IST

Gaganyaan Mission: इसरो चीफ एस.सोमनाथ ने बताया कि आने वाले समय में अंतरिक्ष एजेंसी अपनी बहुप्रतीक्षित मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम 'गगनयान' के लिए महिलाओं को तरजीह देगा। उन्होंने कहा, वायु सेना की लड़ाकू विमान उड़ाने वाली महिला पायलटों और महिला वैज्ञानिकों को प्राथमिकता दी जाएगी।

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गगनयान मिशन

Photo : Twitter

Gaganyaan Mission: चंद्रयान और सूर्ययान के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) गगनयान की तैयारी कर रहा है। इस मिशन के पहले फ्लाइट टेस्ट को सफलतापूर्वक अंजाम दिया जा चुका है। जनवरी तक इसरो ऐसे तीन और परीक्षण करेगा और इसके बाद भारत पहली बार इंसानों को अंतरिक्ष में भेजेगा। इसरो की यह अंतरिक्ष यात्रा तीन दिन की होगी और इसके बाद भारत ऐसा करने वाला चौथ देश बन जाएगा।

हालांकि, इसरो की योजना बड़ी है और इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ ने इसको लेकर एक और बड़ा खुलासा किया है। इसरो चीफ ने बताया कि आने वाले समय में अंतरिक्ष एजेंसी अपनी बहुप्रतीक्षित मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम 'गगनयान' के लिए महिलाओं को तरजीह देगा। उन्होंने कहा, वायु सेना की लड़ाकू विमान उड़ाने वाली महिला पायलटों और महिला वैज्ञानिकों को प्राथमिकता दी जाएगी।

महिला अंतरिक्ष यात्रियों की खोज कर रहा इसरो

गगनयान जैसे मानव मिशन में महलाओं की भूमिका पर पूछे गए सवाल के जवाब में इसरो प्रमुख ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है, लेकिन हमें भविष्य में ऐसी महिलाओं का पता लगाना होगा। उन्होंने किहा, मानवयुक्त मिशन के 2025 तक शुरू होने की उम्मीद है। यह एक छोटी अवधि का मिशन होगा और इसके लिए शुरुआती तौर पर वायु सेना के फाइटर पायलटों की टेस्टिंग की जाएगी। उन्होंने कहा, अभी हमारे पास परीक्षण के लिए महिला लड़ाकू पायलट नहीं हैं, लेकिन एक बार जब वे आ जाएंगी तो यह नया रास्ता होगा।

2035 तक इसरो बनाएगा अपना अंतरिक्ष स्टेशन

इसरो प्रमुख ने कहा, हमारा लक्ष्य 2035 तक पूरी तरह से परिचालन क्षमता वाला अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करना है। बता दें, अभी अंतरिक्ष में सिर्फ दो अंतरिक्ष स्टेशन हैं। पहला नासा का अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन और दूसरा चीन का स्पेस स्टेशन। इसरो ने बीते शनिवार को गगनयान मिशन के पहले टीवी-डी2 परीक्षण वाहन की सफलतापूर्वक लॉन्चिंग की थी। उड़ान भरने से 5 सेकेंड पहले तकनीकी खराबी के कारण इस टेस्टिंग को रोका गया था। हालांकि, 2 घंटे के बाद इसरो ने गड़बड़ी को दूर करके परीक्षण वाहन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया और उसे धरती पर वापस लाए थे।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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