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हमास से जंग के बीच नेतन्याहू को बड़ा झटका, इजराइल के वॉर कैबिनेट मंत्री गैंट्ज ने दिया इस्तीफा

Israel War Cabinet Minister Benny Gantz Resigns: बेनी गैंट्स ने इजराइल में नए चुनाव कराने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू हमें जीत की ओर बढ़ने से रोक रहे हैं, इसलिए मैं अपने पद से इस्तीफा देता हूं। यह प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

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इजराइल के वॉर कैबिनेट मंत्री गैंट्ज ने दिया इस्तीफा

Photo : Twitter

Israel War Cabinet Minister Benny Gantz Resigns: इजराइल और हमास के बीच जंग लंबे समय से जारी है। इस जंग में दोनों पक्षों को बड़ा नुकसान हुआ है तो हजारों लोग अबतक मारे जा रहे हैं। दुनिया के तमाम देश युद्ध को रोकने की मांग कर रहे हैं, लेकिन इजराइल है कि हमास को खत्म किए बिना मानने को राजी नहीं है। इस बीच इजराइल से बड़ी खबर सामने आई है। इजराइल की वॉर कैबिनेट मंत्री बेनी गैंट्स ने इस्तीफा दे दिया है। यह प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

बेनी गैंट्स ने इजराइल में नए चुनाव कराने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू हमें जीत की ओर बढ़ने से रोक रहे हैं, इसलिए मैं अपने पद से इस्तीफा देता हूं। गैट्स ने बेंजामिन नेतन्याहू पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे अपने राजनीतिक अस्तित्व को प्राथमिकता दे रहे हैं, युद्धविराम समझौते पर आगे नहीं बढ़ रहे हैं, जिससे गाजा में लगभग 100 बंधकों की रिहाई नहीं हो पा रही है।

जल्द ही इजराइल में कराए जाएं चुनाव

बेनी गैंट्स ने इस्तीफा देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू राजनीतिक विचारों के कारण निर्णय लेने में वो झिझक रहे हैं। नेतन्याहू की सरकार के खिलाफ बढ़ते जन विरोध को देखते हुए, आने वाली सर्दियों में चुनाव कराये जाने चाहिए। उन्होंने नेतन्याहू से चुनाव के लिए एक तिथि निर्धारित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, हमारे लोगों को अलग-थलग न होने दें। इसके जवाब में, नेतन्याहू ने रविवार को एक बयान जारी कर कहा कि इजरायल कई मोर्चे पर अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। बेनी, यह छोड़ कर भागने का समय नहीं है।

बेनी गैंट्स ने पहले ही दी थी इस्तीफे की चेतावनी

बता दें, बेनी गैंट्ज़ ने इस्तीफे से पहले मई में दक्षिणपंथी प्रधानमंत्री नेतन्याहू को अल्टीमेटम दिया था, जिसमें उन्होंने मांग की थी कि नेतन्याहू गाजा के लिए एक स्पष्ट रणनीति बनाएं, और युद्धविराम समझौते पर सहमत हों। नेतन्याहू की दक्षिणपंथी गठबंधन सरकार से समर्थन वापस लेने के गैंट्ज़ के फैसले के बाद अब सरकार में रूढ़िवादी मंत्री ही बचे हैं, जो गाजा पट्टी पर फिर से कब्जा करने और वहां इजरायली बस्ती का विस्तार करने की वकालत करते हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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