Indo-Pakistani War 1965, Abdul Hamid Story: इस वर्ष, भारत 1965 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में विजय की 60वीं वर्षगांठ मना रहा है। पिछले शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। सिंह ने शुक्रवार को नई दिल्ली के साउथ ब्लॉक में भारतीय सशस्त्र बलों के पूर्व सैनिकों को संबोधित करते हुए उनकी वीरता की सराहना की।
इस कार्यक्रम में उन्होंने ने युद्ध के दौरान कई व्यक्तियों का उल्लेख किया और उनकी वीरता और बहादुरी के बारे में बताया। इनमें से एक व्यक्ति अब्दुल हमीद थे, जो वो भारतीय सैनिक थे जिन्होंने चार पाकिस्तानी टैंकों को नष्ट कर दिया था, जहां मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था।
सिंह ने कहा, 'हमारे बहादुर अब्दुल हमीद ने हमें सिखाया कि बहादुरी हथियारों का खेल नहीं, बल्कि दिल, जिगर का काम है। कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी साहस, संयम और देशभक्ति का मेल असंभव को भी संभव बना सकता है।'
हमीद कौन थे? क्या जानते हैं आप उनकी कहानी
हमीद का जन्म 1 जुलाई, 1933 को ब्रिटिश भारत में उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के धामूपुर गांव में एक किसान परिवार में हुआ था। कहा जाता है कि वह बहुत कम उम्र में ही भारतीय सेना में शामिल हो गए थे। उन्हें भारतीय सेना में कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार (CQMH) बनाया गया और उन्होंने चौथी ग्रेनेडियर्स बटालियन में सर्विस की।
भारत और पाकिस्तान 1947 में कश्मीर को लेकर एक युद्ध लड़ चुके थे। फिर 1965 में पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ ऑपरेशन जिब्राल्टर शुरू किया। यह मामला अप्रैल में कच्छ के रण में दोनों पक्षों के बीच हुई झड़पों के बाद से सुलग रहा था, जहां अगस्त 1965 में पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा जम्मू-कश्मीर पर आक्रमण के बाद भड़क उठा। यह संघर्ष ऐसा था, जहां द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार सबसे अधिक टैंकों का यूज किया गया।
भारत के साथ सोवियत संघ तो अमेरिका था पाकिस्तान का मददगार
उस समय भारत सोवियत संघ के साथ मजबूती से जुड़ा हुआ था, जबकि पाकिस्तान को अमेरिका का साथ था। 1954 में एक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद, इस्लामाबाद ने वाशिंगटन से 1.5 अरब डॉलर की सैन्य सहायता प्राप्त की थी, जो एक बहुत बड़ी मदद थी। तब पाकिस्तान की द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान फेमस हुए पैटन टैंकों सहित अन्य अमेरिकी उपकरणों तक पहुंच थी।
8 सितंबर को पाकिस्तान ने पंजाब के अमृतसर पर कब्जा करने की कोशिश की। यहीं असल उत्तर (असली जवाब) की लड़ाई में हमीद एक राष्ट्रीय नायक बन गए।

परमवीर चक्र से नवाजे गए अब्दुल हमीद। PC- इंडिया पोस्ट
असल उत्तर की लड़ाई
पंजाब के खेमकरण सेक्टर में हुई यह लड़ाई 8 से 10 सितंबर तक चली। इसमें भारत की 4 माउंटेन डिवीजन ने स्थानीय पैदल सेना और तोपखाने के समर्थन से, खेमकरण के उत्तर में पंजाब के तरनतारन जिले में प्रसिद्ध पैटन टैंकों सहित पाकिस्तान की बख्तरबंद यूनिट का सामना किया।
हथियारों के मामले में भारतीय सैनिक भारी पड़ रहे थे। फिर भी हमीद और उनकी कंपनी ने घने गन्ने के खेतों में मोर्चा संभाला और दुश्मन का इंतजार किया।
रचना बिष्ट रावत ने 'The Brave: Param Vir Chakra Stories' में लिखा है, 'खेतों में गन्ने की सरसराहट हो रही है और हामिद अपनी जीप की पैसेंजर सीट पर बैठा है, जिस पर एक रिकॉइललेस (RCL) गन लगी है और हवा के झोंके चल रहे हैं। चीमा गांव के आगे जीप एक संकरी कच्ची पगडंडी पर धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है... ऊंची फसल के पीछे छिपकर, हामिद अपनी बंदूक उनकी दिशा में तानता है और फिर इंतजार करता है। ग्रेनेडियर्स दुश्मन को आगाह न कर पाने के लिए अपनी गोलीबारी रोक लेते हैं.'
'जैसे ही टैंक 30 गज के दायरे में आते हैं, हमीद अपने लोडर से बंदूक लोड करने और गोली चलाने को कहता है। वह देखता है कि गोला ऊपर जाता है और दुश्मन के पहले टैंक पर लगता है। जैसे ही वह अपनी दूरबीन उठाता है, उसे धमाका सुनाई देता है। और फिर देखा तो टैंक उसकी आंखों के सामने जल रहा था। हमीद और उसके साथी खुशी से झूम उठते हैं।'

गाजीपुर के भामूपुर गांव में परमवीर चक्र से नवाजे गए अब्दुल हमीद की जयंती पर स्मारक का अनावरण किया गया था। Photo- PTI
हमीद ने खुद को बहुत जोखिम में डालकर कम से कम चार टैंकों को नष्ट कर दिया। कहा जाता है कि उन्होंने पांचवें टैंक को खराब कर दिया और छठे टैंक को भी उन्होंने सामने टिकने नहीं दिया। हालांकि, दुर्भाग्य से, वह युद्ध में जीवित नहीं बच पाए।
एक और टैंक पर लगाया निशाना...दी शहादत
मेजर जनरल इयान कार्डोजो ने अपनी पुस्तक में लिखा है, 'अगले टैंक और अब्दुल हमीद ने एक साथ एक-दूसरे को देखा। अकेले होने के कारण, वह अपनी स्थिति नहीं बदल सकता था, इसलिए उसने अपने हथियार को फिर से लोड किया और आगे बढ़ गया। पाकिस्तानी टैंक गनर और अब्दुल हमीद ने एक-दूसरे को अपनी नजर के क्रॉस-हेयर में रखा और लगभग एक साथ गोली चलाई। अब्दुल हमीद ने तुरंत अपनी प्राणों की आहुति दे दी। यह स्पष्ट नहीं है कि दुश्मन का टैंक भी नष्ट हुआ या नहीं। हालांकि, बटालियन के इतिहास में लिखा है कि दोनों ने एक साथ गोली चलाई और एक-दूसरे को उड़ा दिया।'
हालांकि हमीद को आधिकारिक तौर पर चार पाकिस्तानी टैंकों को नष्ट करने का श्रेय दिया गया था, लेकिन फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट में अन्य स्रोतों का हवाला देते हुए कहा गया कि यह संख्या आठ से नौ और यहां तक कि 12 तक भी हो सकती है।
'पैटन का कब्रिस्तान'
इस युद्ध ने पंजाब में पाकिस्तान की महत्वाकांक्षाओं को गहरा धक्का पहुंचाया। मीडिया रिपोर्ट में विशेषज्ञों के अनुसार कहा गया कि इस युद्ध में दर्जनों पाकिस्तानी टैंक नष्ट हो गए या उन्हें यूं ही छोड़ दिया गया। इतना कि इस क्षेत्र को 'पैटन का कब्रिस्तान' नाम दिया गया। इसके बाद भारतीय सैनिकों ने आक्रामक रुख अपनाया और सीमा पार करके पाकिस्तान के पंजाब में प्रवेश कर गए, जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने युद्धविराम का आह्वान किया।
कितने दिन चला ये युद्ध?
आज 1965 के भारत-पाक युद्ध की समाप्ति के 60 वर्ष पूरे हो गए हैं। यह युद्ध एक महीने से भी अधिक समय तक चला था और इसमें हजारों लोग हताहत हुए थे। यह संघर्ष 5 अगस्त 1965 को क्षेत्रीय विवादों को लेकर शुरू हुआ और धीरे-धीरे तीव्र होता गया। भारत और पाकिस्तान दोनों ने युद्ध विराम पर सहमति व्यक्त की। यह युद्ध फिर उस वर्ष 23 सितंबर को रुका।
