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धड़ाधड़ रेलवे कर रहा है अफसरों को बर्खास्त, 139 को VRS के लिए दवाब; जानें क्या कहता है नियम

  • Authored by: शिशुपाल कुमार
  • Updated Nov 24, 2022, 08:23 PM IST

भारतीय रेलवे ने स्पष्ट कर दिया है कि रेलवे में काम नहीं करने वाले और भ्रष्ट अधिकारियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पिछले एक साल में, भारतीय रेलवे ने लगभग 177 अधिकारियों को काम नहीं करने या भ्रष्टाचार के मामलों के कारण निकाल दिया है। साथ की दर्जनों को वीआरएस लेने के लिए कह चुका है।

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रेलवे ने बीते 16 महीने में हर तीन दिन में एक 'निकम्मे या भ्रष्ट अधिकारी' को बर्खास्त किया है।

Photo : BCCL

भारतीय रेलवे अपने निकम्मे अधिकारियों पर सख्त रुख अपना रहा है। रेलवे पिछले 16 महीने में हर तीसरे दिन एक भ्रष्ट या निक्कमे अधिकारी को नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा चुका है। साथ ही 139 अधिकारियों को वीआरएस लेने के लिए कह चुका है।

भ्रष्ट अधिकारियों पर गाज

सूत्रों की मानें तो बुधवार, 23 नवंबर को भारतीय रेलवे ने और दो वरिष्ठ अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है। उनमें से एक को कथित तौर पर सीबीआई ने हैदराबाद में 5 लाख रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा था। दूसरा अधिकारी भी रांची में तीन लाख रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया था।

कर्मचारियों को क्यों निकाल रहा है रेलवे

दरअसल सरकारी नौकरी का मतलब ही था एक बार एंट्री कर लो, उसके बाद आराम करो, लेकिन अब सरकार यहां सख्त हो चुकी है। काम नहीं करने वाले को सीधे बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। रेलवे कै कार्मिक और प्रशिक्षण सेवा के नियम 56 (जे) के तहत एक सरकारी कर्मचारी को तीन महीने की नोटिस अवधि के बाद सेवानिवृत्त या बर्खास्त किया जा सकता है।

रेलवे के एक अधिकारी ने कहा- "रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव 'काम करो नहीं तो हटो' के अपने संदेश के बारे में बहुत स्पष्ट हैं। हमने जुलाई 2021 से हर तीन दिन में रेलवे के एक भ्रष्ट अधिकारी को बाहर किया है।"

किससे इस्तीफा मांगा गया है

जिन लोगों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के लिए मजबूर किया गया है, उनमें इलेक्ट्रिकल और सिग्नलिंग, चिकित्सा और सिविल सेवाओं के रेलवे कर्मचारी के नाम शामिल हैं। साथ ही स्टोर, यातायात और यांत्रिक विभागों के कर्मचारियों को भी इसके लिए मजबूर किया जा रहा है।

क्या कहता है नियम

मौलिक नियम और सीसीएस (पेंशन) नियम, 1972, यह कहता है कि 'उचित प्राधिकारी को एफआर 56 (जे), एफआर 56 (एल) या नियम 48 (1) (बी) के तहत सरकारी कर्मचारी को सेवानिवृत्त करने का पूर्ण अधिकार है। यदि जनहित में ऐसा करना आवश्यक हो तो यह सही है।

एजेंसी इनपुट के साथ

शिशुपाल कुमार
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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