Operation Kaveri Mission: खराब हालात के बीच सूडान(Sudan Crisis) से ऑपरेशन कावेरी के जरिए भारतीयों को निकालने का काम जारी है। इस बीच भारतीय वायुसेना के पायलट्स ने उस कौशल का परिचय दिया जिसे देख और सुन हैरत में आ गए क्या ऐसा भी हो सकता है। दरअसल सूडान में लड़ाई की वजह से एयरपोर्ट्स पर रात में प्लेन को उतारने के लिए नाइट लैंडिंग इंतजाम नहीं हैं। भारतीय वायु सेना(Indian Air Force) ने अपने C-130J हरक्यूलिस परिवहन विमान को वाडी सैय्यदना हवाई पट्टी पर उतारा जो कि खराब स्थिति में था।
शानदार लैंडिंग के जरिए रचा इतिहास
वाडी सैय्यदना एयर स्ट्रिप पर कोई नेविगेशनल एप्रोच एड्स या ईंधन और लैंडिंग लाइट नहीं थी, जो रात में उतरने के लिए एक विमान का मार्गदर्शन करने के लिए आवश्यक है। C-130J उन यात्रियों को बचाने के लिए सूडान के वाडी सैय्यदना में एक हवाई पट्टी पर उतरा।वायु सेना के पायलटों ने रात में लैंडिंग करने के लिए नाइट विजन गॉगल्स (night vision goggles) का इस्तेमाल किया। हवाई पट्टी के निकट आने के दौरान एयरक्रू ने अपने इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रा-रेड सेंसर का उपयोग यह सुनिश्चित करने के लिए किया कि छोटे रनवे पर कोई बाधा न हो। रनवे साफ है यह सुनिश्चित करने के बाद साहसी पायलटों ने सामरिक दृष्टिकोण अपनाया। लैंडिंग के बाद विमान के इंजन चलते रहे।
टेकऑफ के दौरान भी एनवीजी का इस्तेमाल
वायु सेना की विशेष बल इकाई के आठ गरुड़ कमांडो ने यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर बोर्डिंग सुनिश्चित की। खराब हवाई पट्टी पर लैंडिंग की तरह टेकऑफ के दौरान भी एनवीजी का उपयोग किया गया। वाडी सैय्यदना और जेद्दाह के बीच ढाई घंटे का ऑपरेशन काबुल में किए गए ऑपरेशन के समान है। मानवीय संकट के दौरान साहसी ऑपरेशन करने के लिए वायु सेना के खाते में एक और कामयाबी जुड़ गई। सूडान में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए आज भारत 'ऑपरेशन कावेरी' के तहत 754 लोगों को उनके घर लाया। वायु सेना द्वारा सी-17 परिवहन विमान में जहां 392 लोगों को दिल्ली लाया गया, वहीं शेष 362 भारतीयों को बेंगलुरु लाया गया।
