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Video: 'आगे कुआं, पीछे खाई जैसी स्थिति...', ट्रेड डील और कपास किसानों को लेकर राहुल गांधी ने सरकार पर लगाया बड़ा आरोप

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि प्रस्तावित डील में “18% टैरिफ बनाम 0%” जैसी शर्तें भारतीय किसानों, खासकर कपास उत्पादकों और टेक्सटाइल सेक्टर के लिए नुकसानदेह हो सकती हैं। उनका कहना है कि इससे घरेलू उद्योग पर दबाव बढ़ेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।

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कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने ट्रेड डील को लेकर बड़ा आरोप लगाया है।

Photo : ANI

India US Trade Deal: कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने ट्रेड डील और किसानों का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्बोंने कहा कि भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता किसानों और कपास व वस्त्र उद्योग पर गंभीर प्रभाव डालेगा।

उन्होंने सवाल उठाया है कि अमेरिका के मुकाबले भारत को “18 प्रतिशत टैरिफ बनाम 0 प्रतिशत” की स्थिति में क्यों रखा जा रहा है, जिससे घरेलू उत्पादकों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नुकसान का सामना करना पड़ेगा।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह समझौता देशहित के बजाय विदेशी कंपनियों और बाजारों के पक्ष में “एकतरफा दबाव” है, और इससे खेतिहर किसान, विशेषकर कपास और सोयाबीन उत्पादक, प्रभावित होंगे। राहुल गांधी ने कहा कि जहां भारतीय वस्त्रों पर अमेरिका में 18 प्रतिशत टैरिफ लगता है, वहीं बांग्लादेश को इस शर्त पर वस्त्र निर्यात पर शून्य प्रतिशत टैरिफ का लाभ दिया जा रहा है कि वह अमेरिकी कपास का आयात करे।

भारत से कपास के आयात पर रोक लगा सकता है बांग्लादेश: राहुल गांधी

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो शेयर करते हुए दावा किया कि बांग्लादेश भारत से कपास के आयात में संभावित कमी या रोक के संकेत दे रहा है, जिससे भारतीय उत्पादकों के लिए स्थिति और खराब हो सकती है।

कांग्रेस सांसद ने वीडियो के माध्यम से कहा, "18 प्रतिशत बनाम 0 प्रतिशत टैरिफ। मैं समझाता हूं कि कैसे माहिर झूठे प्रधानमंत्री और उनका मंत्रिमंडल इस मुद्दे पर भ्रम फैला रहे हैं। और कैसे वे भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के जरिए भारत के कपास किसानों और कपड़ा निर्यातकों को धोखा दे रहे हैं।

राहुल गांधी ने कपास के किसानों के लेकर क्या कहा?

बांग्लादेश को अमेरिका को वस्त्र निर्यात पर 0 प्रतिशत टैरिफ का लाभ दिया जा रहा है।एकमात्र शर्त यह है कि वे अमेरिकी कपास आयात करें। भारतीय वस्त्रों पर 18 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा के बाद, जब मैंने संसद में बांग्लादेश को दी जा रही विशेष छूट के बारे में सवाल उठाया, तो मोदी सरकार के एक मंत्री का जवाब था: "अगर हमें भी यही लाभ चाहिए, तो हमें अमेरिका से कपास आयात करना होगा।" यह तथ्य अब तक देश से क्यों छिपाया गया?"

उन्होंने कहा कि यह समझौता लाखों लोगों को बेरोजगारी और आर्थिक संकट की ओर धकेल देगा। उन्होंने सरकार द्वारा वार्ता के संचालन की भी आलोचना की और कहा कि राष्ट्रीय हित में हुए समझौते में कपास किसानों और कपड़ा निर्यातकों दोनों की सुरक्षा का प्रावधान होना चाहिए था। यह किस तरह की नीति है? क्या यह वाकई कोई विकल्प है - या यह हमें 'आगे कुआं, पीछे खाई' वाली स्थिति में धकेलने के लिए बनाया गया एक जाल है? अगर हम अमेरिकी कपास आयात करते हैं, तो हमारे अपने किसान बर्बाद हो जाएंगे। अगर हम इसे आयात नहीं करते हैं, तो हमारा कपड़ा उद्योग पिछड़ जाएगा और नष्ट हो जाएगा।

राहुल गांधी ने कहा,"भारत में वस्त्र उद्योग और कपास की खेती आजीविका की रीढ़ हैं। करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी इन्हीं क्षेत्रों पर निर्भर है। इन क्षेत्रों पर हमला करने का मतलब है लाखों परिवारों को बेरोजगारी और आर्थिक संकट के दलदल में धकेलना। राष्ट्रीय हित में सोचने वाली दूरदर्शी सरकार कपास किसानों और वस्त्र निर्यातकों दोनों की समृद्धि की रक्षा और सुनिश्चित करने वाला समझौता करती। लेकिन ठीक इसके विपरीत हुआ है।

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Piyush Kumar
Piyush Kumar author

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घट... और देखें

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