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भारत का सही दोस्त अमेरिका या रूस, आंकड़ों से समझें

  • Produced by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटलEdited by: ललित राय
  • Updated Dec 1, 2022, 07:11 AM IST

अमेरिका, भारत से अपनी प्रगाढ़ दोस्ती की ना सिर्फ बात करता है बल्तकि जताने की कोशिश करता है। लेकिन यह कितना सच है इसे आंकड़ों से समझने की जरूरत है। वहीं रूस और भारत के रिश्ते को भी आंकड़ों के जरिए बताएंगे।

पूरी दुनिया में जब रूस अकेला पड़ा है। जब रूस के खिलाफ अमेरिका और यूरोप ने पूरी ताकत लगा रखी है। जब रूस पर अलग अलग तरह के प्रतिबंध लगे हुए हैं। जब रूस को यूक्रेन युद्ध लड़ने के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है। तब अगर दुनिया में रूस को अमेरिका और पश्चिमी देशों से कोई बचा रहा है तो वो देश है-भारत। Reuters न्यूज़ एजेंसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और यूरोप के देशों के लगाए आर्थिक प्रतिबंध झेल रहे

रूस को भारत से कच्चे माल की जरूरत

रूस में वहां की इंडस्ट्री और ट्रेड मिनिस्ट्री ने अपने देश की कंपनियों से कहा है कि उन्हें जो भी raw materials या equipment चाहिए, उसकी एक लिस्ट दे दें। इस raw materials और equipment को भारत से मंगवा रहा है। जैसेरूस की कार इंडस्ट्री की तरफ से 14 पन्नों की लिस्ट भेजी गई है, जिसमें उन पार्ट्स के बारे में बताया गया जिनकी जरूरत कार मैन्यूफैक्चरिंग में होती है।इनमें pistons, oil pumps, ignition coils जैसे engine components के अलावा bumpers और seatbelts शामिल हैं। एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर के लिए 41 आइटम्स की लिस्ट भेजी गई है, जिसमें gear components के अलावा fuel, communication और fire extinguishing systems हैं

रूस से भारत लगातार खरीद रहा तेल

इसके अलावा रूस का तेल भी भारत लगातार खरीद रहा है। एक अनुमान के मुताबिकभारत ने नवंबर में रूस से 1 मिलियन bpd यानी 10 लाख barrels per day कच्चा तेल खरीदा है। इससे रूस भारत का टॉप Oil सप्लायर बन गया। रूस के बाद इराक का नंबर है, जहां से भारत ने नवंबर में 9 लाख 60 हजार bpd कच्चा तेल खरीदा है। 1 नवंबर से 15 नवंबर के बीच भारत ने रूस से 730 मिलियन डॉलर यानी करीब 5800 करोड़ रुपये का कच्चा तेल खरीदा है।इससे पहले अक्टूबर में रूस ने भारत को कच्चे तेल की कुल जरूरत का 22% कच्चा तेल निर्यात किया था।रूस से दूसरे देशों को जो कच्चा तेल निर्यात होता है उसे Russian Urals oil कहते हैं। नवंबर का आंकड़ा ये है कि Urals के total sea exports मेंनवंबर में अकेले भारत ने 40% तेल खरीदा है।रूस से तेल खरीदना सस्ता भी है। क्योंकि Brent क्रूड ऑयल जो दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों का बेंचमार्क है, उसके मुकाबले रूस का तेल सस्ता है।ब्रेंट क्रूड का रेट इस वक्त 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। जबकि रूस का Urals क्रूड 58 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है।यानी करीब रूस का तेल करीब 27 डॉलर तक सस्ता है।

रूस से तेल की खरीद, अमेरिका परेशान

अब अमेरिका और पश्चिमी देशों को रूस का तेल बहुत परेशान कर रहा है। और उन्हें लग रहा है कि इसे कंट्रोल करना चाहिए।5 दिसंबर से जी-7 और EU देशों का वो प्रस्ताव भी लागू होने वाला है, जिसमें रूस के तेल पर प्राइस कैप लगाने की बात कही गई थी। रूस के तेल पर 60 से 70 डॉलर प्रति बैरल के प्राइस कैप का प्रस्ताव है, लेकिन फाइनल प्राइस कैप क्या होगा, ये अभी तक तय नहीं हुआ। इसके अलावा 5 दिसंबर से ही यूरोपियन यूनियन ने समुद्री रास्ते से आने वाले रूसी तेल पर प्रतिबंध लगा रहा है। 5 दिसंबर से यूरोप में किसी भी टैंकर ओनर्स को रूस का तेल लाने की इजाजत नहीं होगी, और इनका इंश्योरेंस भी यूरोपियन कंपनियां नहीं कर पाएंगी

यूरोपीय कमीशन का भी कड़ा रुख

इसके अलावा यूरोपियन कमीशन ने आज कहा है कि वो यूरोप में रूस की फ्रीज़ की गई संपत्तियों को जब्त करने का प्लान कर रहा है।अमेरिका और पश्चिमी देश महीनों से ये चर्चा कर रहे हैं कि रूस की जो सरकारी और निजी संपत्तियां फ्रीज की गई है, उन्हें कैसे कानूनी तरीके से जब्त किया जाए।क्योंकि संपत्तियां तभी जब्त की जा सकती है, जब किसी अपराध का दोषी किसी को ठहराया जा सके।इसके अलावा कई संपत्तियां ऐसी हैं, जिन्हें रूसी नागरिकों ने अपने परिवार के सदस्यों या फिर किसी दूसरे के नाम पर किया है। यूरोपीयन कमीशन ने रूस के सेंट्रल बैंक के 300 बिलियन यूरो के भंडार को ब्लॉक किया था और रूसी अमीरों के 19 बिलियन यूरो फ्रीज किए थे।यानी अमेरिका और पश्चिमी देश मिलकर रूस की घेराबंदी करने पर फिर जोर लगा रहे हैं। लेकिन रूस पर अगर इसका असर नहीं पड़ रहा है तो उसकी वजह है भारत। क्योंकि रूस को भारत ने सहारा दिया है।

भारत के साथ व्यापार के मामले में रूस,अमेरिका से आगे

2021 की स्थिति ये थी कि भारत के साथ व्यापार के मामले में रूस 25वें नंबर पर था। और कुल व्यापार करीब 13.1 बिलियन डॉलर था। लेकिन 2022 की स्थिति ये है कि भारत के साथ व्यापार के मामले में रूस 7वें नंबर पर है और 2022 के अप्रैल से अगस्त में ही कुल व्यापार 18.2 बिलियन डॉलर के पार पहुंच गया था। पिछले 5 साल के औसत के हिसाब से देखें तो रूस से भारत का monthly import 430% बढ़ गया है।पहले भारत रूस से 1 से 2% कच्चा तेल खरीदता थाअब महीने में 22% तक कच्चा तेल रूस से खरीदता है। इसके अलावा हथियारों के मामले में2011 से 2021 के बीच भारत ने हथियारों का 60% आयात रूस से किया।

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