पश्चिम एशिया के समुद्री रास्तों पर जारी भारी तनाव के बीच भारत सरकार ने एक बड़ा और कड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है। ओमान के तट के पास कमर्शियल जहाजों पर अमेरिकी सेना द्वारा किए गए हमलों में भारतीय नाविकों के हताहत होने पर नई दिल्ली ने अमेरिका के समक्ष अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। इस सिलसिले में विदेश मंत्रालय (MEA) ने नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के प्रभारी राजदूत (US के चार्ज डी'अफेयर्स) जेसन मीक्स को तलब किया और इस सैन्य कार्रवाई पर आधिकारिक तौर पर गहरा ऐतराज जताया है।
MEA ने दो बार भेजा बुलावा
यह दूसरा मौका है जब भारत ने इस मुद्दे पर अमेरिकी मिशन के प्रमुख को तलब किया। जेसन मीक्स MEA दफ्तर गए भी, तकरीबन 45 मिनट बाद वे दफ्तर से बाहर निकले। शुरुआती दौर में लापता बताए जा रहे 3 भारतीय नाविकों की इस हमले में मौत होने की पुष्टि हो चुकी है। मारे गए बहादुर नाविकों में डेक कैडेट आदित्य शर्मा, इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया और चीफ इंजीनियर पटनम सुरेश शामिल हैं। भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर निर्दोष नागरिक नाविकों की सुरक्षा और उनका जीवन सबसे महत्वपूर्ण है, जिसे किसी भी सैन्य टकराव की वेदी पर नहीं चढ़ाया जा सकता।
जेसन से क्या बोला विदेश मंत्रालय
विदेश मंत्रालय (MEA) ने आज अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स, जेसन मिक्स से यह कहते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया गया कि अमेरिकी नौसैनिक बलों द्वारा ओमान की खाड़ी में भारतीय नाविकों को लेकर जा रहे वाणिज्यिक जहाजों पर लगातार हमले किए जा रहे हैं। इन घटनाओं में पहले ही तीन भारतीयों की दुखद मौत हो चुकी है, जो टाली जा सकती थी। मंत्रालय ने एक बार फिर नाविकों पर घातक और जानलेवा बल प्रयोग को लेकर गहरी चिंता जताई। कहा गया कि ऐसे कदम अस्वीकार्य हैं और संवेदनशील क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा, स्थिरता और भरोसे को कमजोर करते हैं। अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स से अनुरोध किया गया कि वे भारत की गंभीर चिंताओं को अपनी सरकार तक पहुंचाएं और यह सुनिश्चित करें कि क्षेत्र में तैनात अमेरिकी बल नागरिक जीवन की हानि रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएं।
'सेटेबेलो' जहाज पर अमेरिकी सेना ने दागी थी मिसाइल
यह पूरा विवाद 'एमटी सेटेबेलो' नाम के एक कमर्शियल तेल टैंकर पर हुए हमले के बाद गहराया, जिस पर 24 भारतीय क्रू सदस्य सवार थे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने खुद स्वीकार किया है कि अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ओमान के सोहार बंदरगाह के पास इस जहाज के इंजन रूम पर सटीक मिसाइल हमला किया था। अमेरिका का दावा है कि यह जहाज ईरान पर लगे अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों और नाकेबंदी का उल्लंघन कर रहा था और अमेरिकी नौसेना के निर्देशों का पालन नहीं कर रहा था। अमेरिकी हमले के बाद जहाज में भीषण आग लग गई थी। ओमान नौसेना और राहत दलों की मदद से 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया, लेकिन 3 नाविकों को नहीं बचाया जा सका। भारत ने बैठक में इस बात को रेखांकित किया कि यह जहाज अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा ब्लैकलिस्टेड भी नहीं था।
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ईरान ने की हमले की निंदा
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई (Esmail Baghaei) ने अमेरिकी कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे अमेरिका की सशस्त्र डकैती और राजकीय समुद्री डकैती की निरंतर नीति का एक स्पष्ट प्रमाण बताया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह अमेरिका के इस कानूनविहीन आचरण के लिए उसे सख्त जवाबदेह ठहराए, क्योंकि यह वैश्विक शांति, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नौवहन की स्वतंत्रता को लगातार खतरे में डाल रहा है। इस दुखद घटना पर ईरान ने मारे गए भारतीय नाविकों के परिवारों के प्रति गहरी सहानुभूति व्यक्त की है और भारत सरकार तथा भारतीय जनता के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना प्रकट की है।
इस्माइल बाकाई ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर लिखा, "भारतीय वाणिज्यिक जहाजों पर अमेरिका द्वारा किए गए क्रूर हमलों में कम से कम तीन भारतीय नागरिकों की मौत हो गई है, जो अमेरिका की सशस्त्र डकैती और राज्यव्यापी लूटपाट की नीति का स्पष्ट प्रमाण है। हम शहीद भारतीय नाविकों के परिवारों और मित्रों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और भारतीय जनता एवं सरकार के प्रति हार्दिक शोक व्यक्त करते हैं।" उन्होंने आगे लिखा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अमेरिका को उसके इस गैरकानूनी आचरण के लिए जवाबदेह ठहराना चाहिए, जो वैश्विक शांति और सुरक्षा को लगातार खतरे में डाल रहा है और नौवहन की स्वतंत्रता को भी खतरे में डाल रहा है।
