फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित 33वें आसियान क्षेत्रीय मंच (ARF) की बैठक में पाकिस्तान द्वारा कश्मीर और सिंधु जल समझौते (IWT) का मुद्दा उठाए जाने पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने पाकिस्तानी उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार के बयानों को आधारहीन और अनर्गल बताते हुए पूरी तरह से खारिज कर दिया। भारत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों का इस्तेमाल झूठा प्रचार करने और अपने देश के अंदरूनी संकट से ध्यान भटकाने के लिए करना पाकिस्तान की पुरानी आदत बन चुका है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान के दावों का कड़ा जवाब देते हुए दोहराया कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हमेशा भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग रहे हैं और आगे भी रहेंगे। इस मामले पर किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर टिप्पणी करने का पाकिस्तान को कोई नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं है।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें: CJP आंदोलन को मिला सुप्रीम कोर्ट के वकीलों का साथ, संविधान की प्रस्तावना पढ़कर जताया समर्थन
सिंधु जल समझौते पर भारत का सख्त रुख
बैठक के दौरान सिंधु जल समझौते का मुद्दा उठाए जाने पर विदेश मंत्रालय ने अपनी नीति बिल्कुल साफ कर दी। प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा समर्थित सीमा पार आतंकवाद और पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण हमले के जवाब में सिंधु जल समझौते को स्थगित किया गया है। जब तक पाकिस्तान विश्वसनीय और स्थायी रूप से आतंकवाद को शह देना बंद नहीं करता, तब तक यह समझौता स्थगित ही रहेगा।
आंतरिक संकट छुपाने का प्रयास
भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्तान को बहुपक्षीय मंचों का गलत इस्तेमाल करने के बजाय अपने देश के अंदर पल रहे आतंकी ढांचे को खत्म करना चाहिए। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली भ्रामक शब्दावली की निंदा करते हुए कहा कि धार्मिक आड़ में झूठ फैलाना पाकिस्तान के हुक्मरानों की एक नाकाम कोशिश है, जिसका मकसद केवल अपने देश की खस्ताहाल हालत और वैश्विक आतंकी नेटवर्क में अपनी भूमिका से दुनिया का ध्यान भटकाना है।
