अभिनेता राजपाल यादव ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। सरेंडर करने की समय सीमा खत्म होने के बीच राजपाल यादव ने शीर्ष अदालत से राहत की गुहार लगाई है।मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने राजपाल यादव की याचिका पर यह आदेश दिया। राजपाल यादव ने दिल्ली हाईकोर्ट के 10 जुलाई 2026 के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने सात चेक बाउंस मामलों में उनकी दोषसिद्धि और तीन महीने की जेल की सजा बरकरार रखी थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने यादव को सजा भुगतने के लिए सरेंडर करने का निर्देश दिया था। इसके लिए 10 सितंबर की समयसीमा तय की गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट की शर्त पूरी होने पर उन्हें फिलहाल सरेंडर से राहत मिल सकती है।
सात चेक बाउंस मामलों से जुड़ा है विवाद
यह मामला फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए मिले वित्तीय सहयोग से जुड़ा है। फिल्म निर्माता-फाइनेंसर कंपनी Murli Projects Pvt Ltd ने राजपाल यादव, उनकी पत्नी राधा राजपाल यादव और उनकी फिल्म निर्माण कंपनी के खिलाफ सात चेक बाउंस होने को लेकर शिकायतें दर्ज कराई थीं। मामले के मुताबिक, वर्ष 2010 में फिल्म पूरी करने के लिए करीब 5 करोड़ रुपये दिए गए थे। फिल्म की रिलीज में देरी होने के बाद दोनों पक्षों के बीच कई समझौते हुए और रकम की वापसी की शर्तों में बदलाव किया गया।
राजपाल यादव की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई है कि यह रकम मूल रूप से फिल्म में निवेश थी, कर्ज नहीं। उनके मुताबिक, जारी किए गए चेक सुरक्षा के तौर पर दिए गए थे।
2013 के समझौते को बनाया आधार
यादव की याचिका में 21 अप्रैल 2013 के एक बाद के समझौते का भी हवाला दिया गया है। इसके तहत दोनों पक्षों के बीच 10.40 करोड़ रुपये में पूर्ण और अंतिम समझौता हुआ था। इसमें 40 लाख रुपये का RTGS भुगतान भी शामिल था।
याचिका के अनुसार, इस समझौते के बाद पुराने आठ सुरक्षा चेक वापस किए जाने थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और पुराने चेकों के आधार पर चेक बाउंस की कार्रवाई आगे बढ़ती रही।
राजपाल यादव ने सुप्रीम कोर्ट के Gimpex Pvt Ltd बनाम Manoj Goel फैसले का हवाला देते हुए कहा है कि समझौता हो जाने के बाद पुराने चेक से जुड़ी शिकायत आगे नहीं चल सकती। उनका तर्क है कि समझौते के तहत जारी किए गए नए चेक अगर बाउंस होते, तभी नया मामला बन सकता था।
पहले छह महीने की हुई थी सजा
ट्रायल कोर्ट ने अप्रैल 2018 में सातों मामलों में राजपाल यादव और अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया था। शुरुआत में उन्हें हर मामले में छह महीने की जेल और 1.60 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
बाद में सजा में बदलाव किया गया। 22 मई 2019 को उन्हें तीन महीने की साधारण कैद और प्रत्येक मामले में 1.35 करोड़ रुपये का जुर्माना सुनाया गया। सभी सजाएं एक साथ चलने का आदेश दिया गया था। 2024 में सेशन कोर्ट ने दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने भी 10 जुलाई 2026 को राजपाल यादव को राहत देने से इनकार कर दिया।
हाईकोर्ट ने उनकी प्रोबेशन की मांग भी खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौरान यादव को समझौता करने के कई मौके मिले और उन्होंने भुगतान को लेकर कई आश्वासन दिए, लेकिन उन्हें पूरी तरह नहीं निभाया। अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक, सुनवाई के दौरान करीब 2.25 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। हाईकोर्ट ने इस रकम को जुर्माने की देनदारी में समायोजित करने का निर्देश दिया था।
