दिल्ली : नीट यूजी पेपर लीक मामले में आरोपियों ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच की वैधता पर सवाल उठाए हैं। आरोपियों की ओर से राउज एवेन्यू कोर्ट में दलील दी गई कि जांच सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम से जुड़े Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं की गई। आरोप तय करने को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान आरोपी मनीषा गुरुनाथ मंधारे और पी.वी. कुलकर्णी की ओर से पेश वकीलों ने दावा किया कि CBI की जांच कथित तौर पर 2024 के कानून की धारा 12 के विपरीत है। बचाव पक्ष ने जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे बाद में तैयार की गई कार्रवाई बताया।
FIR दर्ज करने में पांच दिन की देरी पर सवाल
बचाव पक्ष के वकीलों ने दलील दी कि सीबीआई को कथित पेपर लीक की जानकारी 7 मई 2026 को मिल गई थी, लेकिन एजेंसी ने 12 मई 2026 को FIR दर्ज की। वकीलों का कहना है कि चार्जशीट में FIR दर्ज करने में हुई पांच दिन की देरी का स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है। बचाव पक्ष के मुताबिक, FIR में देरी और जांच से जुड़े अन्य पहलू CBI की कार्रवाई की वैधता और उसके तरीके पर सवाल खड़े करते हैं।
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13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट
CBI ने कथित NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। कोर्ट इस चार्जशीट का संज्ञान ले चुका है और अब यह तय करने के लिए दोनों पक्षों की दलीलें सुन रहा है कि आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद है या नहीं। इस मामले में CBI की जांच अन्य संभावित आरोपियों और मामले से जुड़े लोगों की भूमिका को लेकर भी जारी है।
14वें आरोपी को न्यायिक हिरासत
मामले में CBI ने शेषराव बजरंग सूर्यवंशी को 14वां आरोपी बताया है। CBI हिरासत की अवधि पूरी होने के बाद कोर्ट ने हाल ही में उसे 18 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। जांच एजेंसी का आरोप है कि सूर्यवंशी ने परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को कथित तौर पर लीक हुए NEET-UG प्रश्न उपलब्ध कराने में भूमिका निभाई। CBI के मुताबिक, उसने चार्जशीट में शामिल आरोपी शुभम खैरनार के साथ कथित साजिश में काम किया और अभ्यर्थियों या उनके परिजनों से पैसे लेने में भी भूमिका निभाई।
एजेंसी का यह भी आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों को नांदेड स्थित एक मकान में ले जाया गया, जहां उन्हें परीक्षा से पहले कथित तौर पर प्रश्न उपलब्ध कराए गए। CBI ने यह दावा भी किया है कि कुछ अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक दस्तावेज और प्रमाणपत्र भुगतान की गारंटी के तौर पर रखे गए थे। फिलहाल राउज एवेन्यू स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट में आरोप तय करने के मुद्दे पर दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें जारी हैं। आरोपों की पुष्टि अभी अदालत में होना बाकी है।
