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अमेरिका के रूस प्रतिबंध बिल पर भारत का कड़ा रुख, MEA ने कहा- 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि

अमेरिकी संसद में रूस प्रतिबंध विधेयक पास होने पर भारत (MEA) ने स्पष्ट किया कि वह अपने 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और विभिन्न स्रोतों से ऊर्जा खरीद जारी रखेगा।

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अमेरिकी संसद में रूसी प्रतिबंध विधेयक पास होने पर भारत सख्त

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में रूस पर नए प्रतिबंध लगाने संबंधी 'लिंडसे ओ. ग्राहम एक्ट 2026' पास होने के बाद भारत ने अपना कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने गुरुवार को साफ किया कि भारत अपने 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और वह बाजार के बदलते रुझानों और अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा खरीद जारी रखेगा। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि विधेयक पारित होने का मतलब यह नहीं है कि भारत पर सीधे 100% टैरिफ लागू हो गया है, बल्कि यह अमेरिकी प्रशासन को ऐसी कार्रवाई करने का वैधानिक अधिकार प्रदान करता है।

क्या है 'लिंडसे ओ. ग्राहम एक्ट 2026'?

पूर्व रिपब्लिकन सांसद के नाम पर तैयार किए गए इस विधेयक में रूस और ईरान पर व्यापक वित्तीय, बैंकिंग और ऊर्जा प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है। इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस का आयात करने वाले पांच सबसे बड़े खरीदार देशों (जिनमें भारत और चीन शामिल हैं) पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा। विधेयक में रूसी ऊर्जा का व्यापार करने वाले जहाजों पर भी कड़े प्रतिबंध शामिल हैं। उन देशों को आंशिक राहत दी गई है, जिनकी कुल प्राकृतिक गैस आयात में रूस की हिस्सेदारी 15% से कम है और जिन्होंने इसमें कटौती के बड़े कदम उठाए हैं।

'व्यापारिक हितों की करेंगे रक्षा'

विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी कदम पर त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत सरकार अपने आर्थिक और व्यापारिक हितों को सुरक्षित रखने के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगी। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, "जैसा कि पहले भी कई अवसरों पर कहा गया है, भारत अपने 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मजबूती से प्रतिबद्ध है। भारत विविध स्रोतों से खरीदारी और बाजार की बदलती गतिशीलता के आधार पर ऊर्जा आपूर्ति जारी रखेगा।"

विदेश मंत्रालय ने आगे बताया कि हाल के महीनों में अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय वार्ताओं में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया था। भारत ने अमेरिका को स्पष्ट कर दिया था कि इस प्रकार के प्रतिबंधों का असर न केवल दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ेगा, बल्कि इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार भी बुरी तरह प्रभावित होगा।

भारतीय उद्योग जगत के साथ मिलकर काम करेगी सरकार

विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया कि अमेरिकी कानून के आगे बढ़ने के साथ ही भारत सरकार देश के व्यापार और उद्योग निकायों के साथ मिलकर काम करेगी, ताकि किसी भी संभावित आर्थिक असर और व्यापारिक जोखिम से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

भारत और चीन, रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में से हैं। ऐसे में वाशिंगटन का यह नया विधेयक वैश्विक कूटनीति और ऊर्जा व्यापार में नई तनातनी पैदा कर सकता है।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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