Operation Regime Change: देश में सत्ता परिवर्तन यानी ‘रिजीम चेंज’ की बहस के बीच कुछ ऐसी आवाजें और बयान सामने आ रहे हैं, जिन्होंने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता बदलने के बजाय कुछ लोग हिंसक आंदोलनों और नेपाल-बांग्लादेश जैसे हालात की उम्मीद लगाए बैठे हैं? क्या प्रदर्शनों के पीछे कोई रणनीति काम कर रही है और क्या भीड़ जुटाने से लेकर प्रदर्शनकारियों की भूमिका तय करने तक की कोई योजना बनाई जा रही है? इन सवालों की तह तक पहुंचने के लिए Times Now नवभारत की इन्वेस्टिगेटिव टीम ने देश के अलग-अलग हिस्सों में व्यापक अंडरकवर स्टिंग ऑपरेशन किया। खुफिया कैमरे पर दर्ज बातचीत में कुछ लोगों के कथित बयान, आंदोलन को लेकर उनकी सोच और रणनीति से जुड़े दावे सामने आए हैं। इन बातचीतों से क्या संकेत मिलते हैं और देश में ‘रिजीम चेंज’ की बहस किस दिशा में बढ़ रही है? देखिए, Times Now नवभारत का यह खास खुलासा।
साफवान कुड़क्कन के ‘रिजीम चेंज’ पर इरादे
Times Now नवभारत के स्टिंग ऑपरेशन में साफवान कुड़क्कन नाम के व्यक्ति से भी अंडरकवर रिपोर्टर ने बातचीत की। साफवान MSF यानी मुस्लिम स्टूडेंट फेडरेशन का दिल्ली यूनिवर्सिटी में अध्यक्ष है । भारत में नेपाल और बांग्लादेश जैसी परिस्थितियां बनने की आशंका को लेकर सवाल पूछे जाने पर साफवान ने कहा- 'ये पक्का है कुछ तो होगा, सबकुछ लंबे वक्त तक सुरक्षित नहीं रखा जा सकता'
इसके बाद अंडरकवर रिपोर्टर ने पूछा कि क्या भारत में नेपाल और बांग्लादेश जैसी परिस्थितियां बनती दिख रही हैं?
खुफिया कैमरे पर इस सवाल के जवाब में साफवान का कहना था- 'मुझे लगता है अगर फिर 20 जुलाई जैसा दिन आया तो नेपाल जैसे हालात हो सकते हैं'
बातचीत को आगे बढ़ाते हुए अंडरकवर रिपोर्टर ने पूछा कि क्या आप लोग बांग्लादेश और नेपाल के लिए तैयार हैं? इस पर साफवान का जवाब था- 'कुछ तो करना पड़ेगा'
मौलाना सिराज खान ऑपरेशन ‘रिजीम चेंज’ का दूसरा चेहरा
स्टिंग ऑपरेशन के दौरान मुंबई में जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के मुंबई चीफ मौलाना सिराज खान से अंडरकवर रिपोर्टर ने बातचीत की। सड़क पर फ्रांस जैसे हिंसक प्रोटेस्ट की संभावना को लेकर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने गैर-मुस्लिमों के सड़क पर उतरने की बात कही। इस बातचीत में मौलाना सिराज खान का बयान था- 'मोमिन जिस दिन खड़ा होगा, किसी के संभाले संभलेगा नहीं'
क्रांतिकारी युवा संगठन के संयोजक भीम ने किया बड़ा खुलासा
चैनल की अगली टीम क्रांतिकारी युवा संगठन के कन्वीनर भीम तक पहुंची। अंडरकवर रिपोर्टर ने उनसे पूछा कि 20 जुलाई से पहले प्रदर्शनों में दरी और टेंट दिखाई देते थे, लेकिन बाद में पंखे, कूलर और दूसरी व्यवस्थाएं भी नजर आने लगीं। आखिर इन व्यवस्थाओं के लिए संसाधन कहां से आ रहे थे?
इस सवाल के जवाब में भीम ने कथित तौर पर बताया कि करीब पांच लाख रुपये प्रतिदिन खर्च हो रहे थे। आगे बातचीत में उनका कहना था- 'शुरू में, ये चीज पता चल गई थी। ज्यादातर AAP के फैन थे। आम आदमी से जुड़े थे। बाउंसर कौन लेकर चलता है। जिसके पास कुछ नहीं है वो बाउंसर लेकर चल रहा है ।'
इस पर अंडरकवर रिपोर्टर ने पूछा- 'किसके पास, दिपके के पास था?'
भीम ने हां में सिर हिलाया।
इस बातचीत ने प्रदर्शनों में होने वाले खर्च, संसाधनों की व्यवस्था और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की संभावित भागीदारी को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
KYS की राष्ट्रीय प्रवक्ता मुदिता ने ऑपरेशन रिजीम चेंज में उगले 'राज'!
मुदिता से जब बांग्लादेश-नेपाल जैसे आंदोलन को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, "हम मानते हैं कि वो आंदोलनकारी कदम था। हम ये भी मानते हैं कि हमें ऐसा आंदोलन यहां भी बनाना होगा।"
