India Pakistan Peace Letter: भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से जारी तनाव और कड़वाहट को दूर करने के लिए दोनों देशों के प्रबुद्ध वर्ग ने एक बड़ी पहल की है। भारत और पाकिस्तान की 100 से अधिक जानी-मानी हस्तियों, राजनेताओं, पूर्व राजनयिकों और बुद्धिजीवियों ने एक साझा खुला पत्र जारी किया है।
यह पत्र भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) को भेजा गया है, जिसमें दोनों देशों से दुश्मनी का रास्ता छोड़कर शांति, विकास और सहयोग की नई शुरुआत करने की अपील की गई है।
'सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस' की बड़ी पहल
इस पत्र को 'सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस' नामक संस्था की ओर से जारी किया गया है, जिस पर कुल 100 से ज्यादा प्रमुख लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। पत्र में लिखा गया है कि भारत और पाकिस्तान मिलकर पूरी दुनिया की आबादी का लगभग पांचवां हिस्सा हैं।
यहां की एक बहुत बड़ी आबादी युवाओं की है, जो दुश्मनी और अविश्वास के माहौल के कारण तरक्की के अवसरों से महरूम रह जाते हैं। इन युवाओं को एक सुरक्षित और खुशहाल भविष्य देने के लिए दोनों देशों को आगे आना चाहिए।
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भारत और पाकिस्तान के बड़े चेहरे शामिल
इस मुहिम में दोनों देशों के कई कद्दावर चेहरे एक साथ नजर आ रहे हैं। भारत की तरफ से हस्ताक्षर करने वाले 61 लोगों में नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख डॉ. फारूक अब्दुल्ला, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती, अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक, आरजेडी सांसद मनोज झा और टीएमसी के पूर्व मंत्री हुमायूं कबीर शामिल हैं।
वहीं, पाकिस्तान की ओर से हस्ताक्षर करने वाले 56 लोगों में वहां के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी, वरिष्ठ राजनयिक अशरफ जहांगीर काजी और मशहूर परमाणु वैज्ञानिक परवेज हुदभॉय जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
राजनयिक संबंध और वीजा सेवाओं की बहाली की मांग
इन प्रमुख नागरिकों ने दोनों प्रधानमंत्रियों से मांग की है कि नई दिल्ली और इस्लामाबाद में फिर से 'हाई कमिश्नर' (उच्चायुक्त) नियुक्त किए जाएं और राजनयिक संबंधों को पूरी तरह सामान्य किया जाए। इसके साथ ही, आम नागरिकों के लिए वीजा सेवाओं को भी सामान्य रूप से बहाल किया जाए ताकि लोगों का आपस में मिलना-जुलना और सांस्कृतिक आदान-प्रदान फिर से शुरू हो सके।
कश्मीर और व्यापार पर बातचीत का सुझाव
पत्र में सुझाव दिया गया है कि साल 2004 से 2007 के बीच दोनों देशों के बीच बनी बातचीत की रूपरेखा को ध्यान में रखते हुए जम्मू-कश्मीर सहित सभी पुराने विवादों पर व्यापक द्विपक्षीय बातचीत दोबारा शुरू की जानी चाहिए। इसके अलावा, व्यापार और यात्रा को बढ़ावा देने के लिए अटारी-वाघा भूमि सीमा को पूरी तरह खोलने, श्रीनगर-मुजफ्फराबाद बस सेवा को फिर से शुरू करने और हवाई क्षेत्र को कमर्शियल उड़ानों के लिए खोलने की मांग की गई है।
