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Water Crisis: जलाशयों में घटा पानी, बढ़ा खतरा: 166 बांधों में बचा है सिर्फ 27.5% पानी

Water Crisis: देश में मानसून की देरी के कारण पानी का संकट पैदा होता दिख रहा है। देश के डैमों में पानी में भारी कमी देखने को मिल रही है।

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मानसून की सुस्ती से सूखने लगे देश के जलाशय! (AI Photo)

Water Crisis: देशभर में मानसून की सुस्त रफ्तार और बारिश में करीब 40% की भारी गिरावट का सीधा असर अब देश के प्रमुख जलाशयों (Reservoirs) पर दिखने लगा है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश के 166 प्रमुख बांधों और जलाशयों में पानी का स्टॉक गिरकर उनकी कुल क्षमता का महज 27.5% रह गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि इन 166 जलाशयों का मौजूदा जलस्तर पिछले 10 वर्षों के औसत (Normal Storage) के मुकाबले अब भी कुछ बेहतर है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार 'अल नीनो' (El Nino) के प्रभाव के चलते मानसून में आई इस सुस्ती ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। यदि बारिश का यही हाल रहा, तो आने वाले दिनों में सिंचाई, पीने के पानी, उद्योगों और सबसे बढ़कर जल-विद्युत परियोजनाओं पर इसका गंभीर संकट मंडरा सकता है।

पावर प्रोजेक्ट्स वाले बांधों पर भी बढ़ा दबाव

देश के इन 166 प्रमुख जलाशयों में से 20 जलाशय ऐसे हैं, जो सीधे तौर पर बड़ी जल-विद्युत परियोजनाओं से जुड़े हैं। इनमें हिमाचल प्रदेश का गोबिंद सागर, पंजाब का थीन डैम, राजस्थान का राणा प्रताप सागर, ओडिशा का हीराकुंड, झारखंड का पंचेत हिल, गुजरात के उकाई व सरदार सरोवर और महाराष्ट्र का पेंच शामिल हैं। मानसून की बेरुखी के कारण इन बिजली परियोजनाओं के सुचारू संचालन पर भी खतरा मंडरा रहा है।

पूर्व, पश्चिम और दक्षिण में हालात चिंताजनक

जलाशयों की स्थिति देश के सभी हिस्सों में एक जैसी नहीं है। जल आयोग के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि- उत्तरी क्षेत्र के 11 और मध्य क्षेत्र के 28 जलाशयों में पानी की स्थिति पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले बेहतर है। पूर्वी (27), दक्षिणी (47) और पश्चिमी (53) क्षेत्रों के जलाशयों का ग्राफ तेजी से नीचे गिरा है, जो बेहद चिंताजनक है।

कुल क्षमता का गणित

देश में निर्मित कुल 257.8 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) की लाइव स्टोरेज क्षमता में से इन 166 प्रमुख जलाशयों की हिस्सेदारी करीब 183.6 BCM (लगभग 71%) है। ऐसे में इनमें पानी कम होना पूरे देश के जल प्रबंधन को प्रभावित करता है।

राज्यों का हाल: कहीं राहत, कहीं आफत

देशभर के जलाशयों में जलस्तर की स्थिति पर गौर करें तो राज्यों के बीच काफी असमानता देखने को मिल रही है। जहां एक ओर असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, नगालैंड, ओडिशा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में जलाशयों का जलस्तर पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले बेहतर बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर आंध्र प्रदेश, गोवा, झारखंड, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, मेघालय, मिजोरम, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के जलाशयों में पानी का स्तर पिछले वर्ष की तुलना में कम दर्ज किया गया है।

2025 बनाम 2026

अगर पिछले साल यानी 2025 से तुलना करें, तो तब मानसून अपने तय समय से 8 दिन पहले ही केरल पहुंच गया था और उसकी प्रगति भी बेहतरीन रही थी। यही वजह थी कि जून के महीने में ही देश के बांध पानी से लबालब होने लगे थे। इसके विपरीत, इस साल (2026) मानसून तय समय से 3 दिन देरी से आया और शुरुआती दौर से ही इसकी चाल बेहद कमजोर बनी हुई है, जिससे खरीफ की फसलों और खेती-किसानी के लिए भी जोखिम बढ़ गया है।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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