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Rahul Gandhi: भारत को अंधेरे में रखा गया...डेटा संप्रभुता के मुद्दे पर राहुल ने सरकार को घेरा, पूछे कई सवाल

Rahul Gandhi on Data Sovereignty: राहुल ने कहा, मैंने अमेरिका के साथ हाल ही में हुए व्यापार समझौते को लेकर सरकार से कुछ सवाल पूछे: अमेरिका के साथ 'बाधाओं को कम करने' का हमारे डेटा पर क्या असर पड़ेगा?

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डेटा सिक्योरिटी पर राहुल गांधी का सरकार पर निशाना

Photo : PTI

Rahul Gandhi on Data Sovereignty: कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने भारत की डेटा संप्रभुता पर चिंता जताते हुए सरकार को निशाने पर लिया है। राहुल ने कहा कि देश को वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में अग्रणी होना चाहिए, लेकिन इसके बजाय उसे इस बारे में अंधेरे में रखा जा रहा है कि उसके डेटा की सुरक्षा कैसे की जाएगी। लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि भारत का डेटा उसके लोगों का है और एआई अर्थव्यवस्था में यह उसकी सबसे बड़ी ताकत बन सकता है - एआई विकसित करने, कंपनियों को आगे बढ़ाने और रोजगार सृजित करने में।

अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते पर सवाल पूछे

राहुल ने अपने व्हाट्सएप चैनल पर एक पोस्ट में कहा, इसलिए मैंने अमेरिका के साथ हाल ही में हुए व्यापार समझौते को लेकर सरकार से कुछ महत्वपूर्ण सवाल पूछे: अमेरिका के साथ 'बाधाओं को कम करने' का हमारे डेटा पर क्या असर पड़ेगा? क्या हमारा स्वास्थ्य डेटा, वित्तीय डेटा और सरकारी डेटाबेस भारत में ही रहेंगे? क्या भारत अभी भी विदेशी कंपनियों को डेटा यहां संग्रहित करने और इसका उपयोग अपने खुद के एआई विकसित करने के लिए करने के लिए बाध्य कर सकता है?

राहुल ने कहा, हमारे डेटा संप्रभुता, स्वास्थ्य डेटा, एआई और स्थानीय डेटा भंडारण से जुड़े हर सवाल का एक ही जवाब दिया जाता है: 'ढांचा', 'संतुलन', 'स्वायत्तता' - बड़े-बड़े शब्द, कोई ठोस जवाब नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार यह बताने से इनकार कर रही है कि वह किन चीजों पर समझौता कर रही है। राहुल ने कहा, हमें वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में अग्रणी होना चाहिए, लेकिन इसके बजाय हमें इस बारे में अंधेरे में रखा जा रहा है कि भारत के डेटा की सुरक्षा कैसे की जाएगी।

राहुल गांधी का सरकार पर निशाना

राहुल गांधी का सरकार पर निशाना

कहा- हमें अपने डेटा के स्वामित्व का अधिकार

उन्होंने जोर देकर कहा कि लोगों को देश के डेटा के संबंध में पारदर्शिता और जवाबदेही का अधिकार है। राहुल ने कहा, हमें अपने डेटा का स्वामित्व और उपयोग करके एक बेहतर भविष्य बनाने का अधिकार है। 1 अप्रैल को लोकसभा में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री से अपने प्रश्न में राहुल गांधी ने पूछा था कि सरकार संयुक्त राज्य अमेरिका-भारत संयुक्त वक्तव्य के तहत डिजिटल व्यापार में बाधाओं को कम करने की अपनी प्रतिबद्धता और भारत के डेटा स्थानीयकरण नियमों, सीमा पार डेटा विनियमों और व्यापक डिजिटल ढांचे के बीच सामंजस्य कैसे बिठाती है।

उन्होंने यह भी पूछा था कि क्या स्वायत्तता की रक्षा के लिए कोई नीतिगत परिवर्तन प्रस्तावित हैं; अगर हां, तो क्या ये प्रतिबद्धताएं महत्वपूर्ण डेटा के स्थानीय भंडारण को अनिवार्य करने, संवेदनशील डिजिटल अवसंरचना तक विदेशी पहुंच को सीमित करने या कृत्रिम बुद्धिमत्ता को मौजूदा या भविष्य में विनियमित करने की भारत की क्षमता को प्रतिबंधित कर सकती हैं?

राहुल ने क्या-क्या पूछा?

राहुल ने यह भी पूछा कि क्या वित्तीय प्रणालियों, डिजिटल पहचान, स्वास्थ्य और कल्याण डेटाबेस, दूरसंचार नेटवर्क और एआई डेटासेट जैसे महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं का विवरण प्रभावित होता है और किस हद तक, और यदि नहीं, तो इसके कारण क्या हैं? उन्होंने उन सुरक्षा उपायों के विवरण के बारे में भी पूछा जो यह सुनिश्चित करते हैं कि ये प्रतिबद्धताएं स्वदेशी एआई विकास, घरेलू मूल्य सृजन और रणनीतिक डिजिटल स्वायत्तता के लिए घरेलू डेटा का उपयोग करने की भारत की क्षमता को कमजोर न करें, विशेष रूप से डेटा स्थानीयकरण, बाजार पहुंच की शर्तों, सीमा पार प्रतिबंधों और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के संबंध में।

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Amit Mandal
अमित कुमार मंडल author

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर... और देखें

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