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देश की पहली कैबिनेट में मिली थी विरोधियों को भी जगह, सरदार पटेल-बाबा साहेब जैसे दिग्गज थे शामिल, एक मात्र महिला मंत्री भी...देखें पूरी लिस्ट

Jawaharlal Nehru First Cabinet: देश की पहली कैबिनेट में महज 14 मंत्री शामिल थे, जिसमें कई दिग्गजों के नाम थे। सबसे रोचक बात यह है कि आजादी के बाद देश की पहली कैबिनेट में नेहरू ने अपने कई धुर विरोधियों को भी जगह दी थी। आइए जानते हैं उनकी पहली कैबिनेट के बारे में...

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जवाहरलाल नेहरू की पहली कैबिनेट (साभार- विकिपी)

Jawaharlal Nehru First Cabinet: लोकसभा चुनाव में देश की जनता ने एक बार फिर से एनडीए को पूर्ण बहुमत दिया है, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार की शाम 7:15 बजे अपने लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए शपथ लेने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई कैबिनेट में कौन-कौन से नेता शामिल होंगे? इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। कई संभावित नामों पर चर्चा भी हो रही है, हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इस बीच हम बात करेंगे देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की पहली कैबिनेट की।

देश की पहली कैबिनेट में महज 14 मंत्री शामिल थे, जिसमें कई दिग्गजों के नाम थे। हालांकि, 1952 में पहले लोकसभा चुनाव के बाद बनी इस कैबिनेट में मंत्रियों की संख्या बढ़कर 21 हो गई थी, जिसमें कुछ डिप्टी मिनिस्टर्स भी शामिल थे। सबसे रोचक बात यह है कि आजादी के बाद देश की पहली कैबिनेट में नेहरू ने अपने कई धुर विरोधियों को भी जगह दी थी। आइए जानते हैं उनकी पहली कैबिनेट के बारे में...

पहली बार एक्सपर्ट्स को किया था शामिल

देश की कैबिनेट में नॉन लीडर एक्सपर्ट्स को शामिल करने की पहली कवायद देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने ही की थी। जवाहरलाल नेहरू ने अपनी पहली कैबिनेट में भाभा ओरिएंटल इंश्योसेंस कंपनी के डायरेक्टर सीएच भाभा को शामिल किया था, जो मूलत: पारसी बिजनेसमैन थे। नेहरू ने भाभा को अपनी कैबिनेट में न केवल जगह दी, बल्कि उन्हें कॉमर्स मिनिस्ट्री की भी जिम्मेदारी सौंपी थी। ठीक इसी तरह नरेंद्र मोदी ने अपनी कैबिनेट में आईएफएस अधिकारी जयशंकर को शामिल कर विदेश मंत्रालय का कार्यभार सौंपा।

ऐसी थी 1947 में देश की पहली कैबिनेट-

1947 में देश की पहली कैबिनेट.

1947 में देश की पहली कैबिनेट.

नाम मंत्रालय
जवाहर लाल नेहरू (प्रधानमंत्री)विदेश मंत्रालय, कॉमनवेल्थ रिलेशन और साइंटिफिक रिसर्च डिपार्टमेंट
सरदार वल्लभभाई पटेल (उपप्रधानमंत्री)गृह मंत्रालय, सूचना प्रसारण व स्टेट डिपोर्टमेंट
डॉ. राजेंद्र प्रसाद फूड एवं एग्रीकल्चर
मौलाना अबुल कलाम आजाद शिक्षा मंत्री
जॉन मथाई रेलवे एवं ट्रांसपोर्ट मंत्री
सरदार बलदेव सिंह रक्षा मंत्री
जगजीवन राम श्रम मंत्रालय
डॉ. एचसी भाभा कॉमर्स मंत्रालय
रफी अहमद किदवईसंचार मंत्रालय
राजकुमारी अमृत कौर स्वास्थ्य मंत्री
डॉ. भीमराव अंबेडकर कानून मंत्री
आरके षणमुखम चेट्टी वित्त मंत्रालय
श्यामा प्रसाद मुखर्जीइंडस्ट्री एवं सप्लाई मंत्रालय
एनवी गाडगिलवर्क्स, माइन एवं पावर मिनिस्टर

विरोधियों को भी मिली थी जगह

देश की आजादी के बाद बनी पहली कैबिनेट में 14 मंत्री थे, इसमें सरदार पटेल और राजेंद्र प्रसाद जैसे दिग्गज नेता शामिल थे। वहीं, जवाहर लाल नेहरू ने अपनी पहली कैबिनेट में धुर विरोधियों को भी जगह दी थी। नेहरू ने अपने विरोधियों डॉक्टर बीआर आंबेडकर और श्यामा प्रसाद मुखर्जी को भी जगह दी थी।

1952 के पहले आम चुनाव के बाद देश की कैबिनेट-

1952 के पहले आम चुनाव के बाद देश की पहली कैबिनेट.

1952 के पहले आम चुनाव के बाद देश की पहली कैबिनेट.

एक मात्र महिला मंत्री

देश की कैबिनेट में महिला सदस्यों की हिस्सेदारी की भी काफी बात होती है। देश की पहली कैबिनेट में केवल एक महिला मंत्री थीं। नेहरू ने 1952 के लोकसभा चुनाव में हिमाचल के मंडी से सांसद राजकुमारी अमृत कौर को शामिल किया था। उन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई थी।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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