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बुलेट ट्रेन के लिए स्पेशल तैयारी: पहली बार भारत में बन रहा ऐसा ट्रैक; देखें वीडियो

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 30, 2024, 07:50 AM IST

India First Ballastless Track: मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलने वाली बुलेट ट्रेन के लिए भारत का पहला बैलेस्टलेस ट्रैक बिछाया जा रहा है। यह ट्रैक गिट्टी रहित होगा। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसका वीडियो भी साझा किया है। उन्होंने कहा है कि मोदी 3.0 में और भी बहुत कुछ होने वाला है।

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बुलेट ट्रेन के लिए बिछाया जा रहा गिट्टी रहित ट्रैक

Photo : Twitter

India First Ballastless Track: भारत में पहली बुलेट ट्रेन मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलेगी। इस रूट पर रेलवे ट्रैक बिछाने का काम जोर-शोर से हो रहा है। पूरे रूट पर भारत का पहला गिट्टी रहित ट्रैक सिस्टम बिछाया जा रहा है। यह जे-स्लैब बैलेस्टलेस ट्रैक सिस्टम है, जिसका वीडियो रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शेयर किया है। इसके साथ ही उन्होंने इस प्रोजेक्ट की प्रगति को लेकर भी जानकारी दी है। रेल मंत्री ने बताया कि बुलेट ट्रेन के लिए भारत का पहला गिट्टी रहित ट्रैक 320 किमी प्रति घंटे की गति सीमा, 295 किमी पियर और 153 किमी के वायाडक्ट का काम पहले ही पूरा हो चुका है। इसके अलावा उन्होंने कहा, मोदी 3.0 में और भी बहुत कुछ होने वाला है।

गुजरात में दो जगह हो रहा ट्रैक का निर्माण

गुजरात में दो जगह हो रहा ट्रैक का निर्माण

बता दें, हाई-स्पीड ट्रेनों के लिए कई देशों में गिट्टी रहित या स्लैब ट्रैक की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। अब इसे भारत में भी प्रयोग किया जा रहा है। मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीडे रेल कॉरिडोर के लिए भारत में पहली बार स्पेशल ट्रैक सिस्टम तैयार किया जा रहा है, जो जे-स्लैब ट्रैक सिस्टम है।

क्या है इसकी खासियत?

जे-स्लैब ट्रैक सिस्टम के मुख्य रूप से चार भाग होते हैं। आरसी ट्रैक बेड, सिमेंट मोर्टार, प्रीकास्ट ट्रैक स्लैब और रेल विद फास्टनर्स। इसमें प्री-कास्ट आरसी ट्रैक स्लैब का निर्माण गुजरात के आनंद और किम में हो रहा है। इस ट्रैक सिस्टम में पहले से बने बनाए ट्रैक स्लैब होते हैं, जो आरसी ट्रैक बेड पर टिके होते हैं। इनकी मोटाई लगभग 300 मिमी होती हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इस रूट पर अप और डाउन लाइनों के लिए पटरियां बिछाई गई हैं। एक आरसी ट्रैक बेड की चौड़ाई 2420 मिमी है।

चार पार्ट्स में होता है पूरा ट्रैक

चार पार्ट्स में होता है पूरा ट्रैक

नापी जाएगी हवा की गति

बुलेट ट्रेन को तेज हवा और आंधी से कोई नुकसान न हो, इसके लिए भी तैयारी की जा रही है। 508 किमी के रूट पर 14 स्थानों पर हवा की गति मापने के लिए एमीमोमीटर लगाए जाएंगे। दरअसल, मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन पश्चिम हिस्से में तटीय क्षेत्रों से होकर गुजरेगी, जहां हवा की गति कुछ क्षेत्रों में केंद्रति होती है।, यह ट्रेन संचालन को प्रभावित कर सकती है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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