भारत ने वैश्विक कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय गवर्नेंस (वित्तीय शासन) के मोर्चे पर एक बहुत बड़ी ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। भारत सरकार के वरिष्ठ नौकरशाह और मौजूदा संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल को मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण (Terror Financing) पर लगाम लगाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) का नया उपाध्यक्ष चुना गया है।
यह पहला मौका है जब भारत इस वैश्विक मानक-निर्धारक संस्था के उपाध्यक्ष पद की कमान संभालेगा। विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस उपलब्धि को भारत के लिए एक बड़ी जीत करार दिया है।
विदेश मंत्रालय ने कहा- भारत की बड़ी जीत
विदेश मंत्रालय ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इस बड़ी कामयाबी की घोषणा करते हुए लिखा "FATF में भारत की बड़ी जीत! भारत सरकार के सचिव श्री विवेक अग्रवाल को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स का उपाध्यक्ष चुना गया है। यह नियुक्ति आतंकवाद के वित्तपोषण और अवैध वित्तीय नेटवर्क से निपटने के वैश्विक प्रयासों में भारत की बढ़ती भूमिका और प्रभाव को दर्शाती है।"
मंत्रालय ने आगे कहा कि भारत लगातार आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' (शून्य सहिष्णुता) की नीति की वकालत करता रहा है। ऐसे में इस नेतृत्वकारी भूमिका से वैश्विक स्तर पर आतंकी नेटवर्कों को ध्वस्त करने और अवैध वित्तीय प्रणालियों को बेअसर करने के भारत के प्रयासों को और मजबूती मिलेगी।
विवेक अग्रवाल के पास है वित्तीय खुफिया मामलों का लंबा अनुभव
मध्य प्रदेश कैडर के 1994 बैच के आईएएस (IAS) अधिकारी विवेक अग्रवाल एक अनुभवी प्रशासक हैं, जिन्हें सार्वजनिक नीति और वित्त के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक का अनुभव है। ये FATF में गाइल्स थॉमसन (यूके) का स्थान लेंगे। इनका कार्यकाल जुलाई 2026 से जून 2027 तक रहेगा।
पहले वे संस्कृति मंत्रालय का प्रभार संभालने से पहले वे वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग में अतिरिक्त सचिव थे। वे भारत के फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (FIU-IND) के निदेशक रह चुके हैं और उन्होंने पहले भी FATF में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया है। इसके अलावा, उन्होंने कृषि मंत्रालय में रहते हुए पीएम-किसान (PM-KISAN), डिजिटल एग्रीकल्चर और एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड जैसी देश की फ्लैगशिप योजनाओं का नेतृत्व भी किया है।
इस नियुक्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए विवेक अग्रवाल ने कहा, "यह नियुक्ति मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग के खिलाफ भारत के सामूहिक प्रयासों और हमारे मजबूत एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग ढांचे की वैश्विक स्वीकार्यता है। मैं अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली को सुरक्षित, समावेशी और मजबूत बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हूं।"
200 से अधिक देशों में बढ़ा भारत का भरोसा
इस ऐतिहासिक नियुक्ति पर संस्कृति मंत्रालय ने भी अपनी खुशी जाहिर की है। मंत्रालय के अनुसार, यह विकास दुनिया के 200 से अधिक क्षेत्राधिकारों (Jurisdictions) के बीच भारत द्वारा बनाई गई साख और भरोसे का प्रतीक है। खासकर डिजिटल भुगतान (Digital Payments) और वर्चुअल एसेट्स (क्रिप्टोकरेंसी जैसी आभासी संपत्ति) से उभरने वाले नए वैश्विक जोखिमों को लेकर नीति तय करने में भारत की भूमिका अब काफी अहम होने वाली है।
क्या है FATF और भारत के लिए इसके मायने?
फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) एक अंतर-सरकारी संस्था है, जिसका मुख्यालय पेरिस में है। यह वैश्विक स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग, सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार और टेरर फंडिंग को रोकने के लिए कड़े नियम और मानक तय करती है। भारत साल 2010 से ही FATF का पूर्ण सदस्य रहा है। हाल ही में FATF के आपसी मूल्यांकन में भी भारत के मजबूत आर्थिक नियमों की काफी सराहना की गई थी। अब नेतृत्व में सीधे शामिल होने से सीमा पार से होने वाले वित्तीय अपराधों और मनी लॉन्ड्रिंग पर नकेल कसने में भारत की आवाज दुनिया भर में सबसे प्रभावी साबित होगी।
