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फिर जेल जाएंगे बिहार के बाहुबली नेता आनंद मोहन? रिहाई के खिलाफ जी. कृष्णैया की पत्नी पहुंचीं सुप्रीम कोर्ट

  • Authored by: शिशुपाल कुमार
  • Updated Apr 29, 2023, 06:53 PM IST

1994 में जी. कृष्णैया की हत्या कर दी गई थी। तब जी. कृष्णैया बिहार के गोपालगंज जिले के जिलाधिकारी हुआ करते थे। जी. कृष्णैया की हत्या के मामले में पूर्व सांसद आनंद मोहन को 2007 में फांसी की सजा सुनाई गई। जिसे बाद में पटना हाईकोर्ट ने उम्रकैद में बदल दिया।

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बाहुबली नेता आनंद मोहन की रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका

Photo : PTI

बिहार के बाहुबली नेता और पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। यह याचिका दिवगंत आईएएस जी. कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया ने दाखिल की है। उन्होंने आनंद मोहन की रिहाई के आदेश को रद्द करने की मांग की है।

मिली थी फांसी की सजा

1994 में जी. कृष्णैया की हत्या कर दी गई थी। तब जी. कृष्णैया बिहार के गोपालगंज जिले के जिलाधिकारी हुआ करते थे। जी. कृष्णैया की हत्या के मामले में पूर्व सांसद आनंद मोहन को 2007 में फांसी की सजा सुनाई गई। जिसे बाद में पटना हाईकोर्ट ने उम्रकैद में बदल दिया।

कैसे हुए रिहा

इसके बाद हाल ही में बिहार सरकार ने कानून में एक संशोधन किया, जिसके कारण आनंद मोहन जेल से रिहा हो गए। आनंद मोहन का नाम उन 20 कैदियों में शामिल है, जिन्हें जेल से रिहा करने के लिए राज्य के कानून विभाग ने इस हफ्ते की शुरूआत में एक अधिसूचना जारी की थी क्योंकि वे जेल में 14 वर्षों से अधिक समय बिता चुके हैं। बिहार जेल नियमावली में राज्य की महागठबंधन सरकार द्वारा 10 अप्रैल को संशोधन किये जाने के बाद सजा घटा दी गई, जबकि ड्यूटी पर मौजूद लोकसेवक की हत्या में संलिप्त दोषियों की समय पूर्व रिहाई पर पहले पाबंदी थी।

पत्नी की अपील

जी. कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया ने याचिका में दलील दी है कि गैंगस्टर से नेता बने आनंद मोहन को सुनाई गई उम्रकैद की सजा उनके पूरे जीवनकाल के लिए है और इसकी व्याख्या महज 14 वर्ष की कैद की सजा के रूप में नहीं जा सकती। उन्होंने उच्चतम न्यायालय में दायर अपनी याचिका में कहा-"जब मृत्यु दंड की जगह उम्रकैद की सजा सुनाई जाती है, तब उसका सख्ती से पालन करना होता है, जैसा कि न्यायालय का निर्देश है और इसमें कटौती नहीं की जा सकती।"

शिशुपाल कुमार
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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