भारतीय वायुसेना का एक सुखोई-30 फाइटर जेट (Sukhoi Su-30MKI) फाइटर विमान रडार संपर्क से गायब हो गया है। इस घटना की जानकारी रक्षा जनसंपर्क अधिकारी (PRO) गुवाहाटी ने दी है। जोरहाट से उड़ान भरने के बाद विमान रडार से गायब हो गया।
रक्षा सूत्रों के अनुसार, विमान के रडार से संपर्क टूटने के बाद वायुसेना की टीमें तुरंत सक्रिय हो गई हैं। स्थिति का पता लगाने और विमान की लोकेशन ट्रेस करने के लिए सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि रडार संपर्क किन परिस्थितियों में टूटा। वायुसेना की टीमें पूरे मामले की जांच कर रही हैं और तथ्य जुटाए जा रहे हैं। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां और वायुसेना के अधिकारी घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और जल्द ही अधिक जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
जान लें सुखोई-30 फाइटर जेट की खासियत
भारतीय वायुसेना का सुखोई-30 फाइटर जेटदेश के सबसे ताकतवर लड़ाकू विमानों में गिना जाता है। भारत के पास इस समय करीब 272 सुखोई-30MKI विमान हैं और इनका निर्माण भारत में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा किया जाता है।
रूस ने साल 2002 में भारत को पहला सुखोई-30MKI विमान सौंपा था। यह दो सीटों वाला बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है, जिसका इस्तेमाल एयर डिफेंस, ग्राउंड अटैक और लंबी दूरी के मिशनों के लिए किया जाता है।
इस फाइटर जेट की अधिकतम रफ्तार करीब 2,110 किलोमीटर प्रति घंटा है और इसकी सामान्य रेंज लगभग 3,000 किलोमीटर तक होती है। हालांकि हवा में ईंधन भरने (रिफ्यूलिंग) की सुविधा के साथ इसकी रेंज को 8,000 किलोमीटर तक बढ़ाया जा सकता है।
यह विमान करीब 38,000 किलोग्राम अधिकतम वजन के साथ उड़ान भर सकता है और लगभग 56,800 फीट की ऊंचाई तक पहुंचने में सक्षम है। सुखोई-30MKI का विकास रूस की सुखोई कॉर्पोरेशन ने 1995 में शुरू किया था।
