Mahua Moitra: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी की तारीफ कर तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। 2020 से पहले टीएमसी में सुभेंदु के साथ बिताए गए समय को याद करते हुए फायर ब्रांड नेता ने कहा है कि उनके राजनीतिक करियर के शुरुआती दिनों में सुभेंदु ने उनकी काफी मदद की। BBC के साथ खास बातचीत में कृष्णानगर की सांसद ने कहा कि आज भले ही सुभेंदु के साथ उनके राजनीतिक मतभेद हों लेकिन पश्चिम बंगाल के सीएम के साथ उनका आज भी इमोशनल कनेक्शन है।' महुआ ने कहा कि 2020 में भाजपा में शामिल होने से पहले सुभेंदु का कद टीएमसी में काफी बड़ा था और वे काफी प्रभावशाली नेता माने जाते थे।
सुभेंदु के साथ बिताए गए पुराने दिनों को याद किया
मोइत्रा ने कहा, 'जहां तक व्यक्तिगत स्तर का सवाल है तो सुभेंदु के साथ मेरा रिश्ता काफी अच्छा हुआ करता था। टीएमसी में जब वह हमारे साथ थे तो उन्होंने मेरी काफी मदद की।' अपनी राजनीतिक यात्रा के शुरुआती दिनों को याद करते हुए मोइत्रा ने कहा कि एक बार जब उन्हें लोकसभा का टिकट नहीं मिला और जब वह काफी निराश थीं तो उस समय सुभेंदु ने उनका साथ दिया। टीएमसी सांसद ने कहा, 'मैं पूरी रात रोती रही और मुझे सांत्वना सुभेंदु ने दिया।' महुआ ने कहा कि चूंकि अब वे दोनों अलग-अलग पार्टियों में है, ऐसे में वे एक-दूसरे से कम बात करते हैं लेकिन कहा कि व्यक्तिगत संबंध पार्टी लाइन से ऊपर होता है।
बागी सांसदों के खेमे में क्या महुआ भी शामिल होंगी?
मोइत्रा ने सुभेंदु की तारीफ ऐसे समय की है जब टीएमसी टूट चुकी है और बागी सांसद भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए के साथ खड़े हैं। सुभेंदु की तारीफ के बाद सियासी गलियारों में अटकलें लग रही हैं कि बागी सांसदों के खेमे में क्या महुआ भी शामिल होंगी और ममता बनर्जी का साथ छोड़ेंगी। इससे पहले हिंदुस्तान टाइम्स के साथ बातचीत में महुआ ने कहा कि 'सुभेंदु अधिकारी की तरह खुले तौर पर पार्टी छोड़ने वाले नेताओं का वह सम्मान करती हैं लेकिन वह उनके खिलाफ हैं जो पार्टी में रहते हुए विश्वासघात करते हैं।'
TMC पर नियंत्रण को लेकर लड़ाई तेज
इस बीच, तृणमूल कांग्रेस पर नियंत्रण को लेकर जारी लड़ाई मंगलवार को और तेज हो गई, जब पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खेमे ने दावा किया कि उसने दो दिन पहले ही नई राष्ट्रीय कार्यसमिति का गठन कर लिया था और बागी गुट द्वारा ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष पद से हटाकर समानांतर नेतृत्व की घोषणा किए जाने से कुछ घंटे पहले ही इसकी जानकारी निर्वाचन आयोग को भेज दी थी। इस घटनाक्रम से संकेत मिलता है कि जहां एक ओर असंतुष्ट नेता संगठनात्मक बदलाव की तैयारी में जुटे थे, वहीं दूसरी ओर ममता बनर्जी ने पार्टी संगठन पर अपने दावे को मजबूत करने के लिए पहले ही कदम उठा लिया था।
