Priyanka Gandhi Vadra in Lok Sabha: लोकसभा में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने ऑपरेशन सिंदूर पर बहस में हिस्सा लिया। प्रियंका ने सेना की तारीफ करते हुए सरकार से कई सवाल पूछे। प्रियंका ने कहा, देश के वीर जवानों को नमन, सेना पर पूरे देश को गर्व। देश को अखंड रखने में सेना का योगदान है। पहलगाम हमला क्यों और कैसे हुआ? सरकार कह रही थी कि घाटी में अमन है। आतंकियों ने चुन-चुनकर 26 लोगों को मारा। प्रियंका ने अपने भाषण में उत्तर प्रदेश के शुभम और उनके परिवार का भी जिक्र किया।
सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
प्रियंका ने कहा, शुभम के परिवार ने कहा कि जब लोगों चुन-चुनकर मारा जा रहा था तो एक भी सुरक्षाकर्मी वहां नहीं था। उनकी पत्नी ने कहा, जब हमें मारा जा रहा था तो वहां एक भी सुरक्षाकर्मी नहीं था, हमें अनाथ छोड़ दिया गया। प्रियंका ने पूछा- वहां सुरक्षा क्यों नहीं थी, क्या पता नहीं था कि वहां रोजाना 5-6 हजार पर्यटक जाते हैं? सरकार ने उन्हें भगवान भरोसे छोड़ दिया। क्या उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री की नहीं है, गृह मंत्री की नहीं है, एनएसए की नहीं है? कुछ महीने पहले गृह मंत्री कश्मीर गए थे, उन्होंने कहा था कि आतंकवाद पर विजय प्राप्त हुई है। जम्मू-कश्मीर गर्वनर ऐसे ही कह देते हैं, बहुत लापरवाही हुई और मैं जिम्मेदार हूं। प्रियंका ने कहा, ये बात यूं ही खत्म हो जाती है, उनसे जिम्मेदारी नहीं ली जाती। बात आई-गई हो जाती है।
टीआरएफ पर निगरानी क्यों नहीं रखी?
प्रियंका ने कहा, आतंकी संगठन टीआरएफ का गठन 2019 में हुआ और 2020 में आतंकी गतिविधि शुरू की, इसने 2020 से 2025 तक करीब 25 हमले किए। इसमें रियासी हमला भी था जिसमें 9 लोग मारे गए थे। इसने 41 सुरक्षाकर्मियों और 27 नागरिकों की हत्या की। सरकार ने इस संगठन ने इसे 2023 में आतंकी संगठन घोषित किया। तीन साल से क्यों नहीं किया, ये सब सरकार के संज्ञान में था, लेकिन कोई भी ऐसे एजेंसी नहीं है जिसे पता चल जाए कि ऐसा भयानक हमला होने जा रहा है। पाकिस्तान में योजना बनी कि हम लोगों को मारेंगे। ये हमारी एजेंसियों की बहुत बड़ी विफलता है।
क्या आईबी चीफ या गृह मंत्री ने इस्तीफा दिया?
कांग्रेस सांसद ने कहा, टीआरएफ ने आम जनता, आर्मी अफसर, पुलिस अधिकारियों को मारा, तो इस पर निगरानी क्यों नहीं रखी गई। क्या आईबी चीफ ने इस्तीफा दिया, क्या गृह मंत्री ने इस्तीफा दिया, जिम्मेदारी ली? इतिहास की बात आप कीजिए, मैं वर्तमान की बात करती हूं। आपको बहाना चाहिए, पूरे परिवार का नाम गिना देते हैं। 11 साल से तो सत्ता में आप हैं। कल गौरव गोगोई ने गृह मंत्री जी से पूछा कि क्या आपकी जिम्मेदारी नहीं थी। राजनाथ जी चिंतन में थे, लेकिन गृह मंत्री जी हंस रहे थे।
मुंबई हमले के 9 हमलावरों को किया था ढेर, एक को फांसी
प्रियंका ने कहा, जब मुंबई हमला हुआ तो सभी आतंकियों को मार दिया गया, एक को पकड़ा गया और उसे फांसी दी गई। तब गृहमंत्री ने इस्तीफा दे दिया था। एक जवाबदेही थी जनता और देश के प्रति। राजनाथ जी तो पुलवावा, उरी और पठानकोट के समय गृह मंत्री थे। अमित शाह के गृह मंत्री रहने के दौरान मणिपुर जल गया, दिल्ली में दंगे हुए, लेकिन वे आज भी पद पर बैठे हुए हैं क्यों? आज देश खोखले भाषण नहीं सुनना चाहता है, सच जानना चाहता है। आप खुद अपनी पीठ थपथपाने में लगे रहते हैं, सेना, संसद, देश से सच छुपाते हैं।
ऑपरेशन सिंदूर का हम सबने समर्थन किया
ऑपरेशन सिंदूर का हम सबने समर्थन किया, दोबारा हुआ तो फिर करेंगे, हमें अपनी सेना पर गर्व है। लेकिन इस ऑपरेशन के सिंदूर का क्रेडिट हमारे प्रधानमंत्री जी लेते हैं। श्रेय लें, ओलंपिक में मेडल मिलता है तो उसका भी श्रेय लेते हैं, लेकिन सिर्फ श्रेय लेने से नेतृत्व नहीं होता है, जिम्मेदारी भी लेनी होती है। देश के इतिहास में पहली बार हुआ कि जंग होते-होते रुक गई। लेकिन इसका ऐलान हमारी सेना नहीं करती, अमेरिका के राष्ट्रपति करते हैं। ये हमारे प्रधानमंत्री की गैर-जिम्मेदारी का सबसे बड़ा सबूत है। आज गृह मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान के पास शरण में आने के अलावा कोई रास्ता नहीं था, तो आप शरण देते ही क्यों हैं। आप इतिहास पर चले गए, मेरे परिवार पर गए, मेरी मां के आंसू पर भी आ गए, लेकिन जवाब नहीं दिया कि ये जंग क्यों रुकी।
मेरी मां के आंसू तब गिरे...
मेरी मां के आंसू तब गिरे, जब उनके पति को आतंकवादियों ने शहीद किया, वे मात्र 44 साल की थीं। 26 लोगों की मौत पर आज मैं ये बात कह रही हूं क्योंकि मैं उनका दर्द महसूस करती हूं। जब सरकार झूठी और कायर हो तो वो बहादुर सेना से पराक्रम को भी कमजोर कर देती है। इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान पर विजय और बांग्लादेश निर्माण का श्रेय कभी नहीं लिया। जिस पाकिस्तानी जनरल के हाथ खून से रंगे थे, वो अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ लंच कर रहा था। इसका जवाब कौन देगा। सरकार साफ-साफ क्यों नहीं कहती कि उसे क्या-क्या नुकसान हुआ।
