देश में महंगे इलाज और प्राइवेट अस्पतालों के अनियंत्रित बिलों पर अंकुश लगाने के लिए संसद की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संबंधी स्थायी समिति ने एक अहम सिफारिश की है। समिति ने अपनी 176वीं रिपोर्ट में सरकार को सुझाव दिया है कि बड़े महानगरों में निजी अस्पतालों के कमरों का किराया उनके आसपास मौजूद 3-स्टार होटलों के औसत किराए से अधिक नहीं होना चाहिए। समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव की अध्यक्षता वाली इस 31 सदस्यीय समिति ने 'सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की सामर्थ्य और पहुंच' शीर्षक वाली रिपोर्ट संसद में पेश की।
3-स्टार होटल को बेंचमार्क बनाने का सुझाव
समिति ने सिफारिश की है कि महानगरों में प्राइवेट अस्पतालों के कमरे का किराया तय करने के लिए अस्पताल के आसपास या उसी क्षेत्र के 3-स्टार होटलों के औसत किराए को एक बेंचमार्क बनाया जाए। समिति ने केंद्र और राज्य सरकारों से आग्रह किया है कि इस मानक को बड़े शहरों में सभी निजी अस्पतालों के लिए कानूनन अनिवार्य बनाया जाए। रूम के बेसिक किराए के अलावा रेजिडेंट डॉक्टर की फीस, नर्सिंग चार्ज, मेडिकल कंज्यूमेबल्स (मास्क, ग्लव्स आदि), भोजन और लॉन्ड्री के खर्चों को पारदर्शी तरीके से अलग से जोड़ा जा सकता है, ताकि पूरा बिल तार्किक रहे। आम बीमारियों और सर्जरी के लिए पैकेज रेट तय किए जाएं, ताकि एक्सटेंडेड फॉलो-अप और रिहैबिलिटेशन के दौरान मरीजों को भारी जेब खर्च से बचाया जा सके।
समिति ने क्यों दिया यह सुझाव?
संसदीय समिति ने अस्पतालों के बिलिंग पैटर्न का विश्लेषण करने के बाद पाया कि एक ही इलाके में स्थित अलग-अलग प्राइवेट अस्पतालों में कमरों के किराए में भारी अंतर होता है।
कई निजी अस्पतालों में मरीज द्वारा चुने गए कमरे के प्रकार (जैसे- जनरल वार्ड, डीलक्स या सूट) के आधार पर डॉक्टर की फीस, सर्जरी और जांच के रेट भी बढ़ा दिए जाते हैं।
रिपोर्ट में 80वें नेशनल सैंपल सर्वे (NSS) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि सरकारी अस्पतालों में जहां औसतन भर्ती का खर्च ₹6,631 आता है, वहीं निजी अस्पतालों में यह औसतन ₹50,508 तक पहुंच जाता है।
प्राइवेट अस्पतालों की प्रतिक्रिया
संसदीय समिति की इस सिफारिश पर हेल्थकेयर इंडस्ट्री और प्राइवेट अस्पताल प्रबंधकों ने सवाल उठाए हैं। अस्पताल प्रशासकों का कहना है कि होटल और अस्पताल की तुलना नहीं की जा सकती। अस्पतालों को 24 घंटे मेडिकल ऑक्सीजन, आईसीयू सपोर्ट, बायो-मेडिकल वेस्ट डिस्पोजल और प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ जैसी क्रिटिकल सेवाएं बनाए रखनी पड़ती हैं, जिनकी लागत होटल की सुविधाओं से बिल्कुल अलग होती है।
