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वोटर लिस्ट से जुड़ेगा जन्म-मृत्यु का आंकड़ा, विधेयक लाने की तैयारी में केंद्र सरकार

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 23, 2023, 01:53 PM IST

Birth and Death Data Link With Electoral Rolls: सरकार जन्म और मृत्यु से जुड़े आंकड़ों को मतदाता सूची और समग्र विकास प्रक्रिया से जोड़ने के लिए संसद में एक विधेयक लाने की योजना बना रही है। यह बात सोवमार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक कार्यक्रम के दौरान कही।

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अमित शाह

Photo : BCCL

Birth and Death Data Link With Electoral Rolls: केंद्र सरकार मतदाता सूची और अन्य डेवलपमेंट प्रोजेक्ट में जन्म और मृत्यु के आंकड़े जोड़ने पर विचार कर रही है। इस बात के संकेत केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दिए हैं। उन्होंने सोमवार को एक कार्यक्रम में कहा कि सरकार जन्म और मृत्यु से जुड़े आंकड़ों को मतदाता सूची और समग्र विकास प्रक्रिया से जोड़ने के लिए संसद में एक विधेयक लाने की योजना बना रही है।

दरअसल, अमित शाह ने यह बात भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त के कार्यालय 'जनगणना भवन' का उद्घाटन करते हुए कही। उन्होंने कहा, जनगणना एक ऐसी प्रक्रिया है जो विकास के एजेंडे का आधार बन सकती है।

सटीक जनगणना से होगा काफी लाभ

अमित शाह ने इस दौरान कहा कि पूरी तरह से डिजिटल और सटीक जनगणना के आंकड़ों के बहुआयामी लाभ होंगे। उन्होंने कहा, इस तरह की जनगणना से यह सुनिश्चित होगा कि विकास योजनाएं गरीबों तक पहुंचें। उन्होंने आगे कहा, अगर जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के आंकड़ों को विशेष तरीके से संरक्षित किया जाए तो विकास कार्यों की समुचित योजना बनाई जा सकती है।

18 साल के होते ही वोटर लिस्ट में जुड़ेगा नाम

अमित शाह ने कहा, जन्म और मृत्यु के आंकड़ों को मतदाता सूची में जोड़ने से जब व्यक्ति 18 साल का होगा, तो उसका नाम स्वयं ही वोटर लिस्ट में जुड़ जाएगा। वहीं, व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसका नाम खुद ही चुनाव आयोग के पास पहुंच जाएगा, जिससे आयोग व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर सकेगा।

पहले टुकड़ों में पूरी होती थी विकास प्रकिया

अमित शाह ने कहा, पहले विकास की प्रक्रिया टुकड़ों में पूरी होती थी, क्योंकि विकास के लिए आंकड़े पर्याप्त नहीं थे। उन्होंने कहा, आजादी के 70 साल बाद देश के हर गांव में बिजली, पानी और स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने की योजना अपनाई गई है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि किसी को भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि इन सुविधाओं को पहुंचाने के लिए कितने पैसे की आवश्यकता होगी, क्योंकि तब जनगणना की उपयोगिता की कल्पना ही नहीं की गई थी।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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