HAL signs SSLV Technology transfer agreement : हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर (IN-Space), न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के बीच बुधवार को बेगंलुरु में एक करार पर हस्ताक्षर हुए। इस करार के तहत स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV) तकनीक का ट्रांसफर होगा। टेक्नॉलजी ट्रांसफर में इस करार को अहम माना जा रहा है।
तीन-चरणीय वाहन है SSLV
SSLV एक तीन-चरणीय वाहन है जिसे 500 किलोग्राम से कम वजन वाले उपग्रहों को लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में प्रक्षेपित करने के लिए डिजाइन किया गया है। समझौते के तहत, एचएएल पहले दो वर्षों में इस तकनीक को आत्मसात करेगा, जिसके बाद 10 वर्षों का उत्पादन चरण होगा। इस अनुबंध के तहत एचएएल को SSLV तकनीक का गैर-विशिष्ट और गैर-हस्तांतरणीय लाइसेंस दिया गया है, जिसमें डिज़ाइन, निर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण, एकीकरण, प्रक्षेपण संचालन, उड़ान-पश्चात विश्लेषण, प्रशिक्षण और सहयोग शामिल हैं। एचएएल भारतीय और वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए SSLV का बड़े पैमाने पर उत्पादन संभालेगा।
मांग को पूरा करने में SSLV की रणनीतिक भूमिका
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स के सीएमडी डी.के. सुनील ने कहा, 'एचएएल, IN-SPACe, इसरो और NSIL के साथ मिलकर SSLV तकनीक को आत्मसात, स्वदेशीकरण और व्यावसायीकरण करेगा, जिससे छोटे उपग्रह प्रक्षेपण सेवाओं में गुणवत्ता और विश्वसनीयता के उच्चतम मानक सुनिश्चित किए जाएंगे। एचएएल यह मानता है कि संचार, पृथ्वी अवलोकन, नेविगेशन और अन्य अनुप्रयोगों के लिए छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण की बढ़ती मांग को पूरा करने में SSLV की रणनीतिक भूमिका है।'
नए अवसर भी पैदा करेंगे
उन्होंने आगे कहा, 'एचएएल के प्रयास न केवल SSLV के स्वदेशी निर्माण को सुनिश्चित करेंगे, बल्कि भारतीय MSMEs, स्टार्ट-अप्स और व्यापक औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए नए अवसर भी पैदा करेंगे।' इस तकनीकी हस्तांतरण के माध्यम से अब एचएएल को प्रक्षेपण यान का निर्माण, स्वामित्व और संचालन करने की स्वायत्तता होगी। यह रणनीतिक तकनीकी हस्तांतरण एचएएल को एक पुर्ज़ा आपूर्तिकर्ता से एक समग्र प्रक्षेपण सेवा प्रदाता के रूप में स्थापित करेगा।
