Gyanvapi Carbon Dating: ज्ञानवापी परिसर के वीडियोग्राफी—सर्वे के दौरान ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने से मिले कथित शिवलिंग (Shivlinga) की कार्बन डेटिंग और वैज्ञानिक परीक्षण की मांग से जुड़े मामले को वाराणसी (Varanasi) की जिला अदालत ने खारिज कर दिया है। हिन्दू पक्ष ने जिला अदालत से कथित शिवलिंग की कार्बन डेटिंग जांच कराने की मांग की थी, ताकि यह पता लग सके कि वह पत्थर कितना पुराना है। वहीं मुस्लिम पक्ष ने कहा था कि परिसर में मिली आकृति की कार्बन डेटिंग नहीं करायी जा सकती। मुस्लिम पक्ष ने कहा था कि‘दूसरा, हिन्दू पक्ष तोड़—फोड़ की बात कर रहा है, जिससे आकृति नष्ट हो सकती है। जबकि उच्चतम न्यायालय ने उसे संरक्षित रखने का आदेश दिया है। अगर कार्बन डेटिंग के नाम पर आकृति में तोड़ फोड़ की जाती है तो यह उच्चतम न्यायालय के आदेश की अवहेलना होगी।’
वकील ने कहा हाईकोर्ट जाएंगे
हिंदू पक्ष के वकील एडवोकेट मदन मोहन यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'न्यायाधीश ने कार्बन डेटिंग की मांग करने की हमारी मांग को खारिज कर दिया है। हम आदेश की प्रति का इंतजार कर रहे हैं। उच्च न्यायालय जाने का विकल्प हमारे पास उपलब्ध है और हम अपनी बात उच्च न्यायालय के समक्ष भी रखेंगे कार्बन डेटिंग उन्होंने साफ कर दिया है कार्बन डेटिंग की आवश्यकता नहीं है। इस विषय को यही समाप्त कर दिया जाए। कोई साक्ष्य नहीं मिल रहा है ऐसा न्यायाधीश ने कहा। हम कॉपी मिलने के बाद विस्तृत अध्ययन करेंगे और उसके बाद उच्च न्यायालय का रूख करेंगे। विज्ञान की कसौटी पर जीवन जिया जाता है।'
इंद्रेश कुमार का बयान
कार्बन डेटिंग पर कोर्ट के फैसले से पहले RSS नेता इंद्रेश कुमार बोले- 'मैं सबसे अपील करूंगा कि न्यायपालिका पर विश्वास रखें, जो फैसला आएगा वो सत्य और सही होगा। आगे अपने मुकदमे को बढ़ाने के लिए जो प्रयत्न करने चाहिए वो करने चाहिए। जो सत्य होगा उसकी विजय होगी। इसके बाद बहुत सारे विकल्प आएंगे, वैज्ञानिक लोग भी आएंगे और ज्ञानी लोग भी आएंगे। दुनिया में रास्ते कभी बंद नहीं होते हैं। हिंदुस्तान के लोगों ने कभी मस्जिद नहीं तोड़ी विदेशी आंक्रांताओं ने मंदिर तोड़े ये सत्य है। राम मंदिर के समय भी बहुत सारी रूकावटें आई लेकिन सत्य की जीत हुई।'
