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दिल्ली दंगों की आरोपी गुलफिशा फातिमा तिहाड़ जेल से रिहा; इसी मामले में उमर खालिद-शरजील इमाम को लगा था झटका

सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद 2020 दिल्ली दंगों की आरोपी गुलफिशा फातिमा को तिहाड़ जेल से रिहा किया गया। अदालत ने माना कि उनके खिलाफ ऐसे सबूत नहीं मिले हैं जिससे साबित हो कि वे दंगों की स्वतंत्र कमान संभाल रही थीं। ऐसे में गुलफिशा को लगातार जेल में रखना उचित नहीं है।

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तिहाड़ जेल

Photo : BCCL

2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में आरोपी गुलफिशा फातिमा को बुधवार को तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया। यह रिहाई सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद हुई। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली की एक अदालत ने गुलफिशा की जमानत के आदेश जारी किए थे। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में चार आरोपियों को दो लाख रुपये के जमानत बांड और दो स्थानीय जमानतदारों पर रिहा करने का आदेश दिया था। एक अन्य आरोपी, जिसे सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय से जमानत मिली थी, जमानत बांड दाखिल करने के लिए अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। अदालत ने कहा कि दिल्ली पुलिस द्वारा जमानतदारों और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद सभी प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं पूरी होने पर रिहाई का आदेश पारित किया गया।

उमर खालिद-शरजील इमाम को नहीं मिली थी जमानत

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को राहत देने से इनकार करते हुए कहा था कि उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है। हालांकि, संलिप्तता के क्रम और भूमिका के आधार पर पांच आरोपियों को जमानत दी गई।

गुलफिशा फातिमा के मामले में शीर्ष कोर्ट ने कही थी ये बात

गुलफिशा फातिमा के मामले में शीर्ष अदालत ने कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ आंदोलन के दौरान उन्होंने कई विरोध स्थलों पर स्वतंत्र कमान, संसाधन नियंत्रण या रणनीतिक निरीक्षण का प्रयोग नहीं किया। अदालत ने कहा कि अभियोजन का यह आरोप कि उन्होंने स्थानीय महिलाओं को संगठित किया और एक विरोध स्थल की व्यवस्था का समन्वय किया, मामले के लिए प्रासंगिक है, लेकिन यह यह नहीं दर्शाता कि उन्होंने व्यापक स्तर पर संचालन या रणनीतिक नियंत्रण किया।पीठ ने निचली अदालत को जमानत प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश देते हुए 11 शर्तें भी लगाईं और स्पष्ट किया कि शर्तों का उल्लंघन होने पर जमानत रद्द की जा सकती है।

2020 में सीएए और एनआरसी के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुए थे दंगे

गौरतलब है कि फरवरी 2020 में सीएए और एनआरसी के विरोध प्रदर्शनों के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें 53 लोगों की मौत हुई और 700 से अधिक घायल हुए थे। इस मामले में नामजद 20 आरोपियों में से दो अभी भी फरार हैं, जबकि शेष में से कई ने जमानत के लिए आवेदन किया है। फिलहाल सात आरोपी-सलीम मलिक, शरजील इमाम, उमर खालिद, ताहिर हुसैन, अतहर खान, तसलीम अहमद और खालिद सैफी, अब भी जेल में हैं।

Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

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