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Gujarat Polls से पहले केंद्र का बड़ा दांव! PAK-अफगानिस्तान के अल्पसंख्यकों को मिलेगी भारतीय नागरिकता

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  • Updated Nov 1, 2022, 09:42 AM IST

सिटिजनशिप एक्ट 1955 के तहत एमएचए ने सूबे के आणंद और मेहसाणा में रहने वाले अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैनों, पारसियों को हिंदुस्तानी नागरिकता देने के लिए अधिसूचित किया है।

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केंद्र सरकार के इस कदम को गुजरात चुनाव के मद्देनजर बड़े दांव के रूप में देखा जा रहा है। तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

Photo : IANS

गुजरात में विधानसभा चुनाव 2022 (Gujarat Assembly Elections 2022) से पहले केंद्र सरकार (Union Government) ने बड़ा फैसला लिया है। अब सूबे के दो जिलों में पाकिस्तान (Pakistan), अफगानिस्तान (Afghanistan) और बांग्लादेश (Bangladesh) से आए अल्पसंख्यकों (Minorities) को इंडियन माना जाएगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि उन्हें भारतीय नागरिकता (Indian Citizenship) दी जाएगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने इस बाबत एक अधिसूचना भी जारी की है।

सिटिजनशिप एक्ट, 1955 (Citizenship Act, 1955) के तहत एमएचए ने सूबे के आणंद (Anand) और मेहसाणा (Mehsana) में रहने वाले अफगानिस्तान (Afghanistan), बांग्लादेश (Bangladesh) और पाकिस्तान (Pakistan) के हिंदुओं (Hindu), सिखों (Sikh), बौद्धों (Buddhist), जैनों (Jain), पारसियों (Parsi) को हिंदुस्तानी नागरिकता देने के लिए अधिसूचित किया है।

MHA Notification before Gujarat Polls 2022

MHA Notification before Gujarat Polls 2022

चूंकि, जिला कलेक्टरों से गुजरात चुनाव से पहले नागरिकता देने का अधिकार दिया गया है। ऐसे में सियासी गलियारों, विश्लेषकों और चुनावी पंडितों के बीच इस कदम को केंद्र का बड़ा दांव माना जा रहा है। हालांकि, ध्यान देने वाली बात है कि यह नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत नागरिकता प्रदान करने का कदम है, न कि विवादास्पद नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 (CAA) का महत्व है।

दरअसल, सीएए भी अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आने वाले हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैनियों, पारसियों और ईसाइयों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान करता है। पर अधिनियम के तहत नियम अभी तक सरकार की ओर से बनाए नहीं गए हैं, इसलिए अब तक किसी को भी इसके तहत नागरिकता नहीं दी जा सकती है।

वैसे, साल 2016, 2018 और 2021 में भी, एमएचए ने गुजरात, छत्तीसगढ़, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के कई जिलों में जिला कलेक्टरों को वैध दस्तावेजों पर भारत में आने वाले छह समुदायों के प्रवासियों को नागरिकता प्रमाण पत्र प्रदान करने का अधिकार दिया था।

अभिषेक गुप्ता
अभिषेक गुप्ताauthor

छोटे शहर से, पर सपने बड़े-बड़े. किस्सागो ऐसे जो कहने-बताने और सुनाने को बेताब. कंटेंट क्रिएशन के साथ नजर से खबर पकड़ने में पारंगत और "मीडिया की मंडी" में लगभग आठ साल का अनुभव. न्यूज, सिनेमा, बाइक्स और घूमने में दिलचस्पी.

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