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ये था भारत का असली 'गदर' प्लानिंग ऐसी कि अंग्रेजों को याद आ गया 1857

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Jun 13, 2023, 01:24 PM IST

History Of Gadar: गदर का मतलब विद्रोह होता है। भारत को कैसे अंग्रेजों से आजाद कराया जाय, इसको लेकर अमेरिका में प्लानिंग की गई। इसी मकसद से गदर पार्टी का अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में 25 जून 1913 को गठन किया गया। गदर आंदोलन के नेताओं ने भारत में सेना में विद्रोह की प्लानिंग की थी। जिससे कि एक झटके में अंग्रेज घुटने टेक दे।

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गदर पार्टी का गठन अमेरिका में किया गया था।

Photo : BCCL

Gadar History And Story Of The Upcoming Movie: भारत में एक बार फिर गदर की चर्चा है। मामला बालीवुड फिल्म गदर-2 के ट्रेलर का है। जिसने एक बार फिर तारा सिंह और शकीना की कहानी की याद दिला दी है। लेकिन फिल्म का नाम रखने की प्रेरणा जहां से फिल्म मेकर को शायद मिली है, वह कहानी बेहद रोंगटे खड़ी करने वाली है। जिसमें देश भक्ति और जोश का ऐसा संगम था कि अगर वह प्लानिंग सफल हो गई होती तो अंग्रेज भारत को 32 साल पहले ही छोड़ कर (1915) चले गए होते। यह उस दौर की बात है जब साल 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद भारत को आजाद कराने की अमेरिका में सबसे बड़ी प्लानिंग की गई। जिसे इतिहास में 'गदर' आंदोलन के नाम से जाना जाता है।

क्या था गदर आंदोलन

गदर का मतलब विद्रोह होता है। भारत को कैसे अंग्रेजों से आजाद कराया जाय, इसको लेकर अमेरिका में प्लानिंग की गई। इसी मकसद से गदर पार्टी का अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में 25 जून 1913 को गठन किया गया। जिसने 'युगान्तर आश्रम' नाम से एक संस्था भी बनाई। जिसका काम विदेशों में रह रहे भारतीयों को एकजुट करना और उन्हें अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह के लिए तैयार करना था। गदर पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष सोहन सिंह भकना थे।

गदर के नेताओं ने इसके लिए दुनिया भर में फैले प्रवासियों भारतीयों को अपने साथ जोड़ा। और उन्हें भारत लौंटने के लिए कहा जिससे कि ब्रिटिश हकुमत के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह किया जा सके। इस मुहिम के लिए जापान, चीन, अफगानिस्तान से भी सपोर्ट लेने की कोशिश की गई। और करीब 8 हजार लोग विद्रोह के लिए भारत लौट रहे थे और उनके पहुंचने की तारीख 1916 तक तय की गई थी। गदर आंदोलन को प्रमुख सोहन सिंह भकना, करतार सिंह सराभा, लाला हरदयाल ने केवल दुनिया में लोकप्रिय बनाया बल्कि भारत में भी जन समर्थन हासिल किया।

21 फरवरी तय की गई विद्रोह का दिन

गदर आंदोलन के नेताओं ने भारत में सेना में विद्रोह की प्लानिंग की थी। जिससे कि एक झटके में अंग्रेज घुटने टेक दे। इसके लिए मेरठ, मियां मीर, फिरोजपुर, लाहौर और दिल्ली,कोहाट, बन्नू और दीनापुर की छावनियों में विद्रोह की प्लानिंग की गई। लेकिन अंग्रेजों को इस प्लानिंग की भनक लग गई और गदर पार्टी के नेताओं के भारत की जमीन पर पहुंचने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया। और 82 गदर नेताओं के ऊपर मुकदमा चलाया। जिसमें 13 सितम्बर 1915 को 24 गदर नेताओं को मौत की सजा सुनाई गई बाकी नेताओं को उम्र कैद की सजा सुनाई गई। इसके 25 अक्टूबर 1915 को लाहौर कांस्प्रेसी केस चलाया गया। इसमें 7 गदर आंदोलन के साथियों को फांसी की सजा दी गई और45 को उम्र कैद की सजा मली। गदर आंदोलन भले ही सफल नहीं हुआ लेकिन इसने देश भक्ति की जो लौ जलाई उसने भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव जैसे क्रान्तिकारियों को स्वतन्त्रता संग्राम में कूदने के लिए प्रेरित किया।

प्रशांत श्रीवास्तव
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करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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