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ईंधन की वैश्विक आपूर्ति पर संकट? पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया LPG पर क्या है सरकार का प्लान, समस्या से कैसे निपटेंगे

पेट्रोलियम मंत्रालय ने अपने एक बयान में कहा कि 'मंत्रालय ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी आपूर्ति को प्राथमिकता दी है और जमाखोरी तथा काला बाजारी को रोकने के लिए 25 दिनों की इंटर-बुकिंग अवधि लागू की है। मध्य पूर्व के कई देशों में तेल का उत्पादन ठप पड़ गया है।

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तेल-एलपीजी संकट से निपटने के लिए सरकार ने उठाए कदम।

Photo : PTI

Disruptions to fuel supply : ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल के हमले और तेहरान के पलटवार के बाद मध्य पूर्व में कच्चे तेल के उत्पादन पर गहरा असर पड़ा है। दुनिया भर में कच्चे तेल एवं ईंधन की आपूर्ति प्रभावित होने लगी है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। इस तेल और ईंधन संकट से निपटने के लिए भारत सरकार ने कदम उठाने शुरू कर दिया हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा है कि ईंधन आपूर्ति में भू-राजनीतिक व्यवधानों और एलपीजी की आपूर्ति पर पड़ रहे दबाव को देखते हुए मंत्रालय ने तेल रिफाइनरियों को एलपीजी का उत्पादन बढ़ाने और इस अतिरिक्त उत्पादन को घरेलू एलपीजी उपयोग के लिए इस्तेमाल करने के आदेश जारी किए हैं।

25 दिनों की इंटर-बुकिंग अवधि लागू

मंत्रालय ने अपने एक बयान में कहा कि 'मंत्रालय ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी आपूर्ति को प्राथमिकता दी है और जमाखोरी तथा काला बाजारी को रोकने के लिए 25 दिनों की इंटर-बुकिंग अवधि लागू की है। आयातित एलपीजी से मिलने वाली गैर-घरेलू आपूर्ति को अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे आवश्यक गैर-घरेलू क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है। रेस्तरां, होटल और अन्य उद्योगों जैसे अन्य गैर-घरेलू क्षेत्रों को एलपीजी आपूर्ति के लिए, तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के तीन कार्यकारी निदेशकों (EDs) की एक समिति गठित की गई है, जो इन क्षेत्रों से मिलने वाले अनुरोधों की समीक्षा करेगी।'

कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब

ईरान युद्ध के तेज होने से पश्चिम एशिया में उत्पादन और पोत परिवहन पर मंडराते खतरे के बीच सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं। हालांकि, बाद में कीमतों में कुछ नरमी देखी गई, लेकिन इस उथल-पुथल से दुनिया भर के शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत सुबह उछलकर 119.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, लेकिन बाद में यह 101 डॉलर के करीब आ गयी। इसी तरह, अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) 119.48 डॉलर तक पहुंचने के बाद घटकर 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया।

तेल भंडार से आपूर्ति जारी करने पर विचार

कीमतों में आई ताजा नरमी का कारण उन खबरों को माना जा रहा था जिनमें कहा गया था कि जी-7 देश रणनीतिक तेल भंडार से आपूर्ति जारी करने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, बाद में सोमवार को ही जी-7 समूह ने फिलहाल इन सुरक्षित भंडारों का उपयोग न करने का फैसला किया है। फ्रांस के वित्त मंत्री ने कहा कि समूह बाजार को स्थिर करने के लिए तैयार है, लेकिन फिलहाल हम भंडार से तेल निकालने की स्थिति तक नहीं पहुंचे हैं। इससे पहले शनिवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सामरिक भंडार के इस्तेमाल की संभावना को कमतर बताया था।

बहरीन के रिफाइनरी परिसर में लगी आग

बहरीन ने ईरान पर पीने के पानी की आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण एक खारे पानी को पीने लायक बनाने के संयंत्र पर हमला करने का आरोप लगाया है। वहीं, बहरीन की राष्ट्रीय तेल कंपनी ने अपने रिफाइनरी परिसर में आग लगने के बाद खेपों के लदान के लिए 'अपरिहार्य परिस्थिति’ (फोर्स मेज्योर) घोषित कर दी है। इसका अर्थ यह है कि युद्ध के कारण पैदा हुई असाधारण परिस्थितियों की वजह से कंपनी अब तेल की आपूर्ति से जुड़े अपने पिछले समझौतों को पूरा करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं है।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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