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बुरी फंसी कांग्रेस? PM मोदी की मां के AI वीडियो मामले में दिल्ली में FIR दर्ज

दिल्ली पुलिस की ओर इस FIR के बारे में जानकारी देते हुए कहा गया कि पीएम मोदी की मां के AI वीडियो के संबंध में शिकायत मिली थी, जिसके बाद उसने ये FIR दर्ज की है।

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अपनी मां के साथ पीएम मोदी (फाइल फोटो- PTI)

पीएम मोदी की मां के AI वीडियो पर अब कांग्रेस बुरी तरह से फंसती दिख रही है। बिहार कांग्रेस ने पीएम मोदी और उनकी मां का एक AI वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया था, अब इसी वीडियो को लेकर दिल्ली में एफआईआर दर्ज की गई है। बीजेपी इस वीडियो के लिए कांग्रेस की जमकर आलोचना कर रही है।

किसने दर्ज कराई FIR

भाजपा दिल्ली के चुनाव प्रकोष्ठ संयोजक संकेत गुप्ता ने इस मामले में 10 सितंबर की शाम बिहार कांग्रेस के आधिकारिक 'एक्स' हैंडल द्वारा पोस्ट किए गए एआई वीडियो के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया कि यह एआई और डीपफेक तकनीक से तैयार किया गया वीडियो है, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी को उनकी मां के साथ दिखाया गया है। यह वीडियो पूरी तरह से फर्जी और भ्रामक है, जिसका उद्देश्य जनता को गुमराह करना और प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत तथा संवैधानिक छवि को नुकसान पहुंचाना है।

'पीएम मोदी का अपमान'

संकेत गुप्ता ने अपनी शिकायत में लिखा, "यह वीडियो न सिर्फ प्रधानमंत्री का अपमान है, बल्कि भारतीय संस्कृति में मां-बेटे के पवित्र रिश्ते की मर्यादा को भी ठेस पहुंचाता है। हीराबेन मोदी अब इस दुनिया में नहीं हैं कि वे अपनी गरिमा की रक्षा कर सकें। उनके नाम और चेहरे का इस तरह से राजनीतिक लाभ के लिए दुरुपयोग करना न सिर्फ अमानवीय है, बल्कि समाज की नैतिकता पर भी चोट है।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के नेता बार-बार प्रधानमंत्री की मां के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है।

कौन करेगा जांच

इस केस की जांच एसआई एल. किपगन को सौंपी गई है। एफआईआर की एक कॉपी मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दी गई है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि 27 और 28 अगस्त को बिहार के दरभंगा में कांग्रेस और राजद की 'वोटर अधिकार यात्रा' के दौरान भी प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया था। संकेत गुप्ता ने शिकायत देते हुए सुप्रीम कोर्ट के तीन ऐतिहासिक फैसलों का हवाला भी दिया। सुब्रमण्यम स्वामी बनाम भारत सरकार (2016), जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी की प्रतिष्ठा पर हमला बोलना संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। केएस पुट्टस्वामी बनाम भारत सरकार (2017), जिसमें निजता और गरिमा को मूल अधिकार माना गया। बॉम्बे पोर्ट ट्रस्ट बनाम दिलीप कुमार (1983), जिसमें प्रतिष्ठा को जीवन के अधिकार से जोड़कर देखा गया।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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