सुप्रीम कोर्ट में जज रह चुके जस्टिस मार्केंडय काटजू ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर के फुटबॉल खेल में भारत की स्थिति को लेकर अपनी नाराजगी और शर्मिंदगी जाहिर की है। उन्होंने मोरक्को का उदाहरण देकर दोनों मुल्कों (भारत और मोरक्को) की जनसंख्या और इस गेम में पहले से होने का जिक्र किया और कहा कि इसके बाद ही हम क्वालिफाई नहीं कर पाए। यह कितनी शर्म की बात है!
उन्होंने यह बात बुधवार (14 दिसंबर, 2022) को माइक्रो ब्लॉगिंग प्लैटफॉर्म टि्वटर के जरिए कही। ट्वीट में लिखा- भारत की आबादी लगभग 1400 मिलियन है, जबकि मोरक्को की जन संख्या 37 मिलियन है। ऐसे में हम उनसे 40 गुणा बड़े हैं और हम मोरक्को के लोगों से काफी पहले फुटबॉल खेल (मोहन बगान की स्थापना 1889 में हुई थी) रहे हैं। फिर भी मोरक्को फीफा विश्व कप 2022 के सेमिफाइनल में है और हम क्वालिफाई तक नहीं कर पाए। यह कितनी शर्म की बात है!

M Katju on Football, FIFA and India
दरअसल, फुटबॉल के महासमर में मोरक्को की टीम कदम दर कदम शहसवारों को मात देती आई है। टीम के सामने विश्व कप सेमीफाइनल में गत चैम्पियन फ्रांस की चुनौती है और इस तिलिस्म को तोड़ना उसके लिए कतई आसान नहीं होगा।
ग्रुप स्टेज में दूसरी रैकिंग वाली बेल्जियम के बाद यूरोपीय दिग्गज स्पेन और पुर्तगाल को नॉकआउट स्टेज में हराने वाली मोरक्को ने अपने देश के फुटबॉल का सबसे सुनहरा अध्याय लिखा है। विश्व कप सेमीफाइनल में जगह बनाने वाली अफ्रीका की पहली टीम मोरक्को पर 1912 से 1956 के बीच फ्रांस का शासन रहा है, लिहाजा इस मैच की सांस्कृतिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि भी है।
