उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में त्रिपुरा के छात्र की कथित नस्लीय हमले में मौत के मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। मृतक छात्र के पिता ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे पर चाकू और कुंद हथियारों से बेरहमी से हमला किया गया था। वहीं, जब वे इसे लेकर पुलिस के पास पहुंचे तो शुरू में पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया। मृतक एंजेल के पिता तरुण चकमा, वर्तमान में मणिपुर में बीएसएफ में तैनात हैं।
मृतक छात्र एंजेल चकमा देहरादून की एक निजी यूनिवर्सिटी में एमबीए का अंतिम वर्ष का छात्र था। कुछ लोगों ने नस्लीय टिप्पणी के बाद उस पर हमला किया था और करीब 17 दिन तक अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझने के बाद शुक्रवार को उसकी मौत हो गई।
भाई को बचाने पर हुआ हमला
एंजेल के पिता तरुण चकमा ने बताया कि उनके दोनों बेटे एंजेल और माइकल 9 दिसंबर को सेलाकुई इलाके में बाजार गए थे। इसी दौरान स्कूटर और बाइक पर सवार करीब छह लोगों ने माइकल पर नस्लीय टिप्पणी करते हुए उसे धक्का दे दिया। जब एंजेल ने इसका विरोध किया तो आरोपियों ने उसे 'चाइनीज,चाइनीज़ मोमो'जैसे नस्लीय शब्दों से अपमानित किया। एंजेल ने खुद को भारतीय बताते हुए विरोध किया,जिसके बाद उस पर चाकू और अन्य हथियारों से हमला कर दिया गया।
गर्दन टूट गई थी- मृतक के पिता
तरुण चकमा का आरोप है कि हमले में उनके बेटे की गर्दन टूट गई थी और पीठ व सिर पर गंभीर चोटें आई थीं। उन्होंने इसे सीधी हत्या करार देते हुए दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मैंने अपना बेटा खो दिया है,अब उसे न्याय मिलना चाहिए।
FIR दर्ज करने में देरी का आरोप
पीड़ित के पिता ने आरोप लगाया कि घटना के बाद पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज नहीं किया। उन्होंने कहा कि हमले के बाद जब हम पुलिस के पास गए तो उन्होंने मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया। बाद में जब ऑल इंडिया चकमा स्टूडेंट्स यूनियन और वरिष्ठ अधिकारियों का दबाव पड़ा तब दो-तीन दिन बाद एफआईआर दर्ज की गई।
पुलिस का है ये कहना
वहीं, मामले में पुलिस का कहना है कि नौ दिसंबर को कैंटीन के पास कुछ युवकों के बीच विवाद हुआ था। इस दौरान एंजेल पर धारदार हथियार और कड़े (धातु का कंगन) से हमला किया गया। इसके बाद गंभीर रूप से घायल एंजेल को अस्पताल में भर्ती कराया गया,जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। देहरादून के एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि इस मामले में अब तक पांच लोगों को हिरासत में लिया गया है, जबकि एक आरोपी नेपाली नागरिक बताया जा रहा है,जो संभवतः नेपाल भाग गया है। तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और दो नाबालिगों को संरक्षण में लिया गया है।
त्रिपुरा में हुआ अंतिम संस्कार
एंजेल चकमा का अंतिम संस्कार त्रिपुरा के उनाकोटी जिले के मछमारा गांव में किया गया। पिता ने बताया कि एंजेल पढ़ाई के साथ-साथ एक अच्छी नौकरी भी हासिल कर चुका था और परिवार को उससे बड़ी उम्मीदें थीं।
