Independent Panel SIR Election Commission: निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची में सुधार के लिए चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर उठ रहे सवालों के बीच एक बड़ा कदम उठाया गया है। 'लॉयर्स एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन' (LAFC) ने चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया की संवैधानिक और कानूनी वैधता की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीशों की एक स्वतंत्र समिति का गठन किया है।
इस 5-सदस्यीय आयोग की कमान उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश मदन बी लोकुर (Justice Madan B Lokur) को सौंपी गई है। उनके अलावा इस पैनल में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ए के पटनायक, जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बदर दुर्रेज अहमद, तथा पूर्व न्यायाधीश रेखा शर्मा और अंजना प्रकाश को शामिल किया गया है। यह आयोग पूरी स्वायत्तता के साथ काम करेगा और यह देखेगा कि मतदाता सूची में सुधार की इस पूरी पद्धति का पात्र मतदाताओं पर क्या असर पड़ा है।
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देश के वरिष्ठ वकीलों की भी जोड़ी गई टीम
आयोग मुख्य रूप से इस बात की निष्पक्ष पड़ताल करेगा कि क्या सभी योग्य नागरिकों के नाम मतदाता सूची में बरकरार रखे गए हैं और क्या अयोग्य नामों को सही नियमों के तहत हटाया गया है या नहीं। इस जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए आयोग की बेंच देशभर के अलग-अलग हिस्सों में जाकर जनसुनवाई करेगी। इस दौरान प्रभावित नागरिकों, नागरिक समाज के संगठनों और विषय विशेषज्ञों की राय व गवाहियां दर्ज की जाएंगी।
इस स्वतंत्र जांच आयोग को रणनीतिक और कानूनी सलाह देने के लिए देश के वरिष्ठ वकीलों की टीम भी जोड़ी गई है, जिनमें कपिल सिब्बल, प्रशांत भूषण, चंदर उदय सिंह, राजू रामचंद्रन और वृंदा ग्रोवर जैसी प्रमुख हस्तियां शामिल हैं। आयोग अपनी पूरी जांच के बाद विस्तृत रिपोर्ट और सिफारिशें जारी करेगा।
