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Coal Scam Case: निधन के 2 साल बाद बेदाग साबित हुए पूर्व PM मनमोहन सिंह, 'कोयला घोटाला केस' में मिली क्लीन चिट

कोयला घोटाला केस: सुप्रीम कोर्ट ने कोल ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के खिलाफ चल रही सभी आपराधिक कार्यवाही को खत्म कर दिया है।

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पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह (फाइल फोटो)

कोयला घोटाला केस: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कोल ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ कानूनी कार्यवाही को बंद कर दिया, जो उनके निधन के लगभग दो साल बाद हुआ। कोर्ट ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) की क्लोजर रिपोर्ट को भी स्वीकार कर लिया और 2015 के उस ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया जिसमें उन्हें आरोपी के तौर पर तलब किया गया था।

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि दिसंबर 2024 में सिंह की मौत के बाद यह कार्यवाही बेमतलब हो गई थी। हालांकि, कोर्ट ने एक कदम आगे बढ़कर मामले के गुण-दोषों की जांच की और आखिर में यह नतीजा निकाला कि पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ CBI की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने का कोई आधार नहीं था।

कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाला

यह मामला ओडिशा में तलाबीरा-II कोयला ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा है और यह कोयला ब्लॉक आवंटन के उस बड़े विवाद का हिस्सा था जिसे आम तौर पर 'कोयला घोटाला' या 'कोलगेट' (Coalgate) के नाम से जाना जाता है। इस विवाद के कारण 1993 और 2010 के बीच हुए कोयला ब्लॉक आवंटन में कथित अनियमितताओं को लेकर कई जांच और अदालती कार्यवाही हुईं।

इस विवाद ने एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया था और आखिरकार 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी संख्या में कोयला ब्लॉक आवंटनों को रद्द कर दिया, क्योंकि कोर्ट ने इस प्रक्रिया को मनमाना और गैर-कानूनी करार दिया था।

'सिंह के खिलाफ़ आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं'

बुधवार को अपने आदेश में, सुप्रीम कोर्ट ने CBI के इस रुख को स्वीकार किया कि सिंह के खिलाफ आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं थे। बेंच ने कहा कि क्लोजर रिपोर्ट और जांच रिपोर्ट को स्वीकार या अस्वीकार करने से जुड़े कानूनी सिद्धांतों की जांच करने के बाद, उन्हें ऐसा कोई 'ठोस कारण' नहीं मिला जिसके आधार पर स्पेशल CBI कोर्ट एजेंसी के निष्कर्षों को खारिज कर पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ़ मामले का संज्ञान ले सके।

बेंच ने कहा, 'हमने CBI द्वारा दाखिल दोनों क्लोजर रिपोर्ट देखी हैं। जांच एजेंसी द्वारा दाखिल जांच रिपोर्ट को स्वीकार या अस्वीकार करने के मामले में इस कोर्ट द्वारा लगातार तय किए गए पैमानों को ध्यान में रखते हुए, हम इस बात से संतुष्ट हैं कि CBI द्वारा दाखिल क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने और मामले का संज्ञान लेने का कोई ठोस कारण नहीं था।'

सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पूरी तरह से बंद करने का फ़ैसला किया

सिंह की ओर से पेश हुए सीनियर वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट से गुज़ारिश की थी कि अगर कार्यवाही बंद नहीं की जा रही है, तो क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करते समय स्पेशल जज की ओर से की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को कम से कम हटा दिया जाए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पूरी तरह से बंद करने का फैसला किया।

Ravi Vaish
रवि वैश्यauthor

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों की बारीकियों को समझने और तेजी से प्रस्तुत करने में उनकी विशेष दक्षता है। टीवी पत्रकारिता में रिपोर्टिंग और डेस्क—दोनों क्षेत्रों में अनुभव होने के कारण वे समाचारों को बहुआयामी दृष्टिकोण से देखते हैं। देश–दुनिया की ताजातरीन अपडेट्स, ब्रेकिंग न्यूज, एक्सप्लेनर और विशेष स्टोरीज तैयार करने में वे सिद्धहस्त हैं। उनकी प्राथमिकता हमेशा यही रही है कि हर खबर तेज, सटीक और जानकारीपूर्ण रूप में पाठकों तक पहुंचे। रवि वैश्य अब तक 22,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, इंटरव्यू, ग्राउंड रिपोर्ट्स, विश्लेषण और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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