हाथों से बार-बार फिसल जाता है फोन? रीढ़ की हड्डी से जुड़ी हो सकती है समस्या

कभी-कभार हाथ से फोन छूट जाना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन अगर ऐसा बार-बार होने लगा है तो सावधान हो जाएं। इसके साथ ही गिलास पकड़ने, बटन लगाने, चाबी घुमाने या टाइप करने में परेशानी को भी नजरंदाज ना करें। डॉक्टरों ने चेताया है कि ये चीज रीढ़ की हड्डी की समस्या से जुड़ी हो सकती है।

Authored by: Suneet SinghUpdated Sep 14 2026, 11:23 IST
​क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स​Image Credit : IStock01 / 07

​क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स​

ऑर्थो-स्पाइन एक्सर्ट्स के मुताबिक गर्दन की रीढ़ में मौजूद स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव पड़ने से हाथों की पकड़ और उनकी गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। स्पाइनल कॉर्ड दिमाग और शरीर के बीच संदेश पहुंचाने का काम करती है। इसमें दबाव आने पर हाथ, पैर और शरीर के दूसरे हिस्सों की गति और संवेदना प्रभावित हो सकती है।

​क्या है सर्वाइकल मायलोपैथी?​Image Credit : IStock02 / 07

​क्या है सर्वाइकल मायलोपैथी?​

गर्दन की रीढ़ में स्पाइनल कॉर्ड दबने की स्थिति को सर्वाइकल मायलोपैथी कहा जाता है। उम्र के साथ होने वाले बदलाव, गठिया, हड्डियों में अतिरिक्त बढ़ोतरी, लिगामेंट के मोटे होने या डिस्क के उभरने जैसी वजहों से रीढ़ की नली संकरी हो सकती है। इससे स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव पड़ने लगता है।

क्या हैं सिम्पटम्सImage Credit : IStock03 / 07

क्या हैं सिम्पटम्स

इस समस्या का एक शुरुआती संकेत हाथों का कमजोर महसूस होना हो सकता है। लोग चीजें गिराने लगते हैं।छेटे-मोटे काम पहले की तुलना में मुश्किल लगने लगते हैं। उंगलियों में झनझनाहट या सुन्नपन भी महसूस हो सकता है।

​राइटिंग बदलना भी है संकेत​Image Credit : IStock04 / 07

​राइटिंग बदलना भी है संकेत​

अगर अचानक आपकी लिखावट पहले से ज्यादा बिगड़ी हुई लगे तो ये भी ठीक नहीं है। हाथ और उंगलियों के तालमेल में कमी होने पर लिखने जैसे सामान्य काम में भी ज्यादा मेहनत लग सकती है। खासकर जब इसके साथ हाथों में सुन्नपन या झनझनाहट भी हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

​लड़खड़ाहट को भी नजरंदाज न करें​Image Credit : IStock05 / 07

​लड़खड़ाहट को भी नजरंदाज न करें​

सर्वाइकल मायलोपैथी का असर सिर्फ हाथों तक सीमित नहीं रहता। कुछ लोगों को चलते समय पैर भारी या अकड़े हुए लग सकते हैं। बार-बार ठोकर लगना, संतुलन बिगड़ना या चलते समय दीवार और फर्नीचर का सहारा लेना भी इसका संकेत हो सकता है। गर्दन में तेज दर्द न हो, तब भी यह समस्या मौजूद हो सकती है।

​कैस होती है जांच​Image Credit : IStock06 / 07

​कैस होती है जांच​

ऐसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर पहले आपकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री और न्यूरोलॉजिकल जांच करते हैं। जरूरत पड़ने पर गर्दन की रीढ़ का एमआरआई कराया जा सकता है, जिससे स्पाइनल कॉर्ड, डिस्क और रीढ़ की नली की स्थिति देखी जाती है। इलाज समस्या की वजह और उसकी गंभीरता पर निर्भर करता है। कुछ मामलों में निगरानी या गैर-सर्जिकल इलाज पर्याप्त हो सकता है, जबकि गंभीर दबाव में सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।

​कब डॉक्टर से मिलना जरूरी है?​Image Credit : IStock07 / 07

​कब डॉक्टर से मिलना जरूरी है?​

अगर हाथों की पकड़ लगातार कमजोर हो रही है और साथ में सुन्नपन, झनझनाहट, कमजोरी या चलने में असंतुलन जैसी परेशानी भी है, तो लापरवाही ना करें। स्पाइनल कॉर्ड पर लंबे समय तक दबाव रहने से कुछ नसों को स्थायी नुकसान हो सकता है। इसलिए ऐसे लक्षणों पर समय रहते डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।

End of Photo Gallery
Subscribe to our daily Newsletter!